सिर्फ हिंसा नहीं, साजिश भी आतंकवाद है: कोर्ट ने कहा कि 'आतंकवादी कृत्य' का मतलब सिर्फ हिंसा का अंतिम कार्य (जैसे बम फोड़ना या गोली चलाना) नहीं है। हिंसा तक पहुँचने के लिए की गई तैयारी, साजिश और गतिविधियां (Build-up) भी 'आतंकवादी कृत्य' का हिस्सा हैं ।
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के "बड़ी साजिश" (Larger Conspiracy) मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी, जबकि अन्य पांच आरोपियों को जमानत दे दी। इस फैसले में कोर्ट ने UAPA कानून की दो बड़ी व्याख्याएं (Interpretations) दी हैं
1. 'आतंकवादी कृत्य' (Terrorist Act) क्या है? (धारा 15 की नई व्याख्या)
सुप्रीम कोर्ट ने UAPA की धारा 15(1)(a) की व्याख्या करते हुए 'आतंकवादी कृत्य' के दायरे को बहुत व्यापक कर दिया है।
सिर्फ हिंसा नहीं, साजिश भी आतंकवाद है: कोर्ट ने कहा कि 'आतंकवादी कृत्य' का मतलब सिर्फ हिंसा का अंतिम कार्य (जैसे बम फोड़ना या गोली चलाना) नहीं है। हिंसा तक पहुँचने के लिए की गई तैयारी, साजिश और गतिविधियां (Build-up) भी 'आतंकवादी कृत्य' का हिस्सा हैं
। "अन्य साधनों" (By Other Means) का विस्तार: कानून में लिखा है कि खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल आतंकवाद है, लेकिन इसमें "अन्य साधनों" शब्द भी है। कोर्ट ने कहा कि इसका मतलब यह है कि अगर कोई हिंसा नहीं भी करता, लेकिन ऐसी साजिश रचता है जिससे:
आवश्यक वस्तुओं (Essential Supplies) की आपूर्ति बाधित हो।
देश में आर्थिक असुरक्षा (Economic Insecurity) पैदा हो।
नागरिक जीवन अस्थिर हो जाए।
तो इसे भी 'आतंकवादी कृत्य' माना जाएगा
।
निष्कर्ष: आतंकवाद कोई एक अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह "संगठित, निरंतर और साजिशपूर्ण गतिविधियों" की परिणति (Culmination) है
।
2. भागीदारी का पदानुक्रम (Hierarchy of Participation) और जमानत
अदालत ने जमानत देने के लिए आरोपियों को दो श्रेणियों में बांटा है। इसे कोर्ट ने 'Hierarchy of Roles' (भूमिकाओं का पदानुक्रम) कहा है:
मास्टरमाइंड (Masterminds/Formative Role): वे लोग जिन्होंने साजिश रची, योजना बनाई और जिनका रोल केंद्रीय (Central) था। इनके खिलाफ सबूत मजबूत हैं, इसलिए इन्हें जमानत नहीं मिल सकती (जैसे उमर खालिद, शरजील इमाम)
। फुट सोल्जर्स (Foot Soldiers/Peripheral Role): वे लोग जिन्होंने सिर्फ आदेश का पालन किया या जिनकी भूमिका बहुत सीमित/परिधीय थी। इन्हें लंबे समय तक जेल में रखना गलत होगा
। अनुच्छेद 21 का तर्क: कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपियों को एक ही लाठी से हांकना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है। जिनकी भूमिका कम है, उन्हें बिना ट्रायल के सालों तक जेल में नहीं रखा जा सकता
।
UPSC और UGC NET के लिए स्टेटिक (Static) और विश्लेषणात्मक ज्ञान
1. गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967
उद्देश्य: भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ होने वाली गतिविधियों को रोकना।
धारा 15 (Section 15): इसमें 'आतंकवादी कृत्य' को परिभाषित किया गया है। इसमें भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता को खतरे में डालने के इरादे से किया गया कोई भी कार्य शामिल है।
धारा 43D(5): यह धारा जमानत को बहुत मुश्किल बनाती है। अगर कोर्ट को लगता है कि पुलिस की एफआईआर और केस डायरी को देखकर आरोप "पहली नज़र में सच" (Prima Facie True) लगते हैं, तो जज जमानत नहीं दे सकते। सुप्रीम कोर्ट ने इसी धारा की व्याख्या की है
।
2. मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
नागरिक स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा: यह फैसला एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा (आतंकवाद की व्यापक परिभाषा) को मजबूत करता है, तो दूसरी तरफ 'फुट सोल्जर्स' को जमानत देकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Article 21) की रक्षा भी करता है।
संघवाद और पुलिस शक्ति: UAPA एक केंद्रीय कानून है जिसे अक्सर पुलिस द्वारा असहमति (Dissent) को दबाने के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगता है (जैसा कि संपादकीय में भी तर्क दिया गया है)
।
Mains Answer Writing Practice
प्रश्न: "आतंकवाद विरोधी कानूनों में 'आतंकवादी कृत्य' की परिभाषा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना न्यायपालिका के लिए एक चुनौती रही है। हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के संदर्भ में चर्चा करें।"
उत्तर का ढांचा (Structure):
परिचय: UAPA का उल्लेख करें और बताएं कि यह कठोर कानून है। हालिया दिल्ली दंगा मामले के फैसले का संदर्भ दें।
'आतंकवादी कृत्य' का विस्तार: समझाएं कि कोर्ट ने कैसे हिंसा के साथ-साथ 'साजिश' और 'आर्थिक व्यवधान' को भी इसमें शामिल किया है (धारा 15 की व्याख्या)।
स्वतंत्रता का संरक्षण (Article 21): 'Hierarchy of Participation' के सिद्धांत को समझाएं। कैसे कोर्ट ने कम भूमिका वाले लोगों के लिए जमानत का रास्ता खोला है।
चुनौतियां/आलोचना: संपादकीय के अनुसार, "आतंकवादी कृत्य" की इतनी व्यापक परिभाषा (जैसे आवश्यक सेवाओं को बाधित करना) का दुरुपयोग विरोध प्रदर्शनों (Protests) को दबाने के लिए किया जा सकता है
। निष्कर्ष: राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरी है, लेकिन निर्दोष या कम भूमिका वाले लोगों की स्वतंत्रता का हनन नहीं होना चाहिए। कोर्ट का 'पदानुक्रम' वाला दृष्टिकोण एक संतुलित कदम है।
Comments
Post a Comment