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MPPSC Pre Unit 6 भारत एवं मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था में मध्यप्रदेश की वर्तमान स्थिति

·        भारतीय अर्थव्यवस्था जनवरी 2024 में 3.7 ट्रिलियन $ की हो चुकी है तथा 2025 तक 5 ट्रिलियन का लक्ष्य भारत सरकार में रखा है

·        वर्तमान में भारत विश्व की 5 वीं बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है

·        इसी लक्ष्य में मध्यप्रदेश भी अपना योगदान बढ़ चढ़कर दे रहा है तथा 550 बिलियन $ की अर्थव्यवस्था का निर्माण राज्य ने किया है 2025 तक 1 ट्रिलियन का लक्ष्य प्रदेश सरकार ने रखा है

r भारतीय अर्थव्यवस्था

r मध्यप्रदेश की अर्थवयवस्था

2023-24 का बजट अमृतकालीन पहला बजट था सप्तऋषि नामक 7 प्राथमिकताएँ सुनिश्चित की गई

1.       समावेशी विकास

2.       अंतिम व्यक्ति तक पहुँच

3.       अवसंरचना व निवेश 

4.       सक्षमता सामने लाना

5.       हरित विकास

6.       युवा शक्ति

7.       वित्तीय क्षेत्र

Ø म.प्र. ने भी आत्मनिर्भरता के रोडमैप पर आधारित 2023-24 में जनता का बजट नाम से पेश किया था

Ø प्रदेश का पहला ई-बजट भी इसे माना गया है

कुल बजट राशि – 45.3 लाख करोड़ 2023-24 में रही

कुल बजट राशि म.प्र. में 247.7 हजार करोड़ रुपये 2023-24 में आवंटित की गई

2024-25 में भारत सरकार ने 1 फरवरी 2024 को 47.65 लाख करोड़ रूपए का बजट व्यय पेश किया है

मध्यप्रदेश सरकार का 2024-25 का बजट अभी घोषित होना बाकी है

GDP में विकास दर (2022-23) 7.2 % रही [NSO के अनंतिम अनुमान (2023-24) में 7.3% रहने का अनुमान है]

म.प्र. में GDP विकास दर 16.43% (प्रचलित भाव पर) रही है तथा स्थिर कीमत पर 7.06% रहने का अनुमान है

राष्ट्रीय आय 259.27 लाख करोड़ रुपये  (प्रचलित मूल्य पर) रहने का अनुमान है जो 2022-23 में 238.2 रही

भारत की प्रति व्यक्ति प्रयोज्य आय 2023-24 में 2.14 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।

मध्य प्रदेश जीएसडीपी के संशोधित अनुमान 13,22,821 करोड़ रुपये है (प्रचलित मूल्य पर)

स्थिर मूल्य पर राष्ट्रीय आय 145.85 लाख करोड़ रुपये का अनुमान

स्थिर कीमत पर 6.43 लाख करोड़ रुपये रहेगी


GDP में क्षेत्रवार विभाजन – भारत ( प्रचलति मूल्य)

 

स्रोत : mospi (06 Apr 2024)


GVA में क्षेत्रवार विभाजन – मध्यप्रदेश (प्रचलति मूल्य)

 

स्रोत : मप्र आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22(अग्रिम)


GDP में क्षेत्रवार विभाजन – भारत (स्थिर मूल्य)

 

 स्रोत : mospi (06 Apr 2024)

GVA में क्षेत्रवार विभाजन – मध्यप्रदेश (स्थिर मूल्य)

स्रोत : मप्र आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22
(अग्रिम)

प्रतिव्यक्ति आय – भारत में 1.85 लाख (1,85,854) रहने का अनुमान 2023-24 में NSO ने लगाया है यह पिछले वित्तीय वर्ष में 1.72 लाख रुपये थी

 

स्थिर मूल्य (2011-12) से PCI 1,04,550 रुपये रहने का अनुमान है तथा यह गत वर्ष 98,374 रुपये थी 

स्थिर मूल्य पर प्रदेश की PCI 65,023 रुपये रही है (2022-23) जो 2011-12 के 38,497 रुपये से 68.9% अधिक है

प्रतिव्यक्ति आय अनुसार राज्यों/केंद्रशासित प्रदेश की स्थिति

1.       सिक्किम –सर्वाधिक वृद्धि दर

2.       गोवा

3.       दिल्ली

4.       चंडीगढ़

5.       अंतिम – बिहार

 

 


# प्रथम अग्रिम अनुमान


# अनुमानित दर

 

 

·        फोर्ब्स इंडिया रिपोर्ट 2023 के अनुसार भारतीय GDP में योगदान के आधार पर राज्यों / केंद्रशासित  प्रदेशो की रैंकिंग

1.       महाराष्ट्र

2.       तमिलनाडु

3.       गुजरात

4.       मध्यप्रदेश का स्थान 10वां है

 

म.प्र. एवं भारत के चुने हुये समाजार्थिक विकास संकेतांक (आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23)

 

मद

 

इकाई

मध्यप्रदेश

भारत

 

प्रतिव्यक्ति आय                                                                           2022-23

प्रचलित भावों पर

 

रूपये

140583

170620

स्थिर (2011-12)

 

रूपये

65023

96522

 

बैंकिंग                                                                                        मार्च 2021

प्रति लाख जनसंख्या वाणिज्यिक बैंक

संख्या

10

12

प्रति व्यक्ति जमा राशि

रूपये

70281

140492

ऋण / जमा अनुपात

प्रतिशत

67.4

71.9

जीवनांक                                                                                       सितम्बर 2021

जन्मदर

प्रति हजार व्यक्ति

24.1

19.5

मृत्युदर

प्रति हजार व्यक्ति

6.5

6.0

शिशु मृत्यु दर

प्रति हजार जीवित जन्मदर

43

28

जनसंख्या                                                                                     जनगणना 2011

जनसंख्या का घनत्व

प्रति वर्ग कि.मी.

236

382

पुरुष स्त्री अनुपात

प्रति हजार पुरुषो पर स्त्रियाँ (संख्या)

931

943

जनसंख्या वृद्धि दर (2001-2011)

प्रतिशत

20.3

17.7

कुल जनसंख्या में ग्रामीण जनसंख्या

प्रतिशत

72.4

68.9

कुल जनसंख्या में कुल कार्यशील जनसंख्या (मुख्य +सीमान्त कार्यशील)

प्रतिशत

43.5

39.8

कुल कार्यशील जनसंख्या में कुल महिला कार्यशील जनसंख्या

प्रतिशत

32.6

25.5

कुल कार्यशील जनसंख्या में कृषक

प्रतिशत

31.2

19.9

कुल कार्यशील जनसंख्या में खेतिहर मजदूर

प्रतिशत

38.6

17.9

कुल कार्यशील जनसंख्या में पारिवारिक उद्योग कर्मी

प्रतिशत

3

2.6 

कुल जनसंख्या में अनुसूचित जाति की जनसंख्या

प्रतिशत

15.6

16.6

कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजाति की संख्या

प्रतिशत

21.1

8.6

ऊर्जा (नवकरणीय ऊर्जा अनुमानित)                                         आर्थिक सर्वेक्षण 2022 -23

पवन ऊर्जा

मेगावॉट

15404

695509

सौर ऊर्जा

मेगावॉट

61660

748990

बायोमास ऊर्जा

मेगावॉट

1364

17538

साक्षरता                                                                                     जनगणना 2011

कुल

प्रतिशत

69.3

73

पुरुष

प्रतिशत

78.7

80.9

स्त्री

प्रतिशत

59.2

64.6


2021-22:
पहला संशोधित अनुमान ; 2022-23: अनंतिम अनुमान ; 2023-24 : पहला अग्रिम अनुमान

स्त्रोत : सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय  

 

 

 

प्रमुख अर्थव्यवस्था में वृद्धि दरें

(आईएमएफ के जनवरी 2024 के आकलन)

 

IMF

जनवरी 2024 के पूर्वानुमान

अक्टूबर 2023 के पूर्वानुमान की तुलना ताजा पूर्वानुमान में अंतर

 

2022

2023 अनुमान

2024

2025

2024 के लिए

सम्पूर्ण विश्व

3.5

3.1

3.1

3.2

0.2

विकसित राष्ट्र

2.6

1.6

1.5

1.8

0.1

अमरीका

1.9

2.5

2.1

1.7

0.6

यूरोप क्षेत्र

3.4

0.5

0.9

1.7

- 0.3

जापान

1.0

1.9

0.9

0.8

- 0.1

एमर्जिंग मार्केट्स एंड डेवलपमेंट इकोनॉमीज

4.1

4.1

4.1

4.2

0.1

चीन

3.0

5.2

4.6

4.1

0.4

भारत*

7.2

6.7

6.5

6.5

0.2   

रूस

-1.2

3.0

2.6

1.1

1.5

ब्राजील

3.0

3.1

1.7

1.9

0.2

सऊदी अरब

8.7

-1.1

2.7

5.5

-1.3

द.अफ्रीका

1.9

0.6

1.0

1.3

-0.8

कम आय वाले विकासशील देश

5.2

4.0

5.0

5.6

-0.1

वस्तुओं और सेवाओं का वैश्विक व्यापार

5.2

0.4

3.3

3.6

-0.2

·        भारत में वृद्धि दर के आंकड़े वित्तीय वर्ष के लिए है, इसमें भारत के लिए 2022 से तात्पर्य 2022-23 से तथा 2023 से तात्पर्य 2023 -24 से है

मध्यप्रदेश आर्थिक स्थिति एक समीक्षा 2022-23


 

1.     कृषि एवं खाद्य प्रबंधन

मध्यप्रदेश देश में खाद्यान्न का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

2.     उद्योग. ऊर्जा एवं परिवहन क्षेत्र

·        द्वितीयक क्षेत्र का वर्ष 2021-22 (त्व.) से वर्ष 2022-23 (.) में 5.42 प्रतिशत की विकास दर वृद्धि अनुमानित है।

·        खनिज :- खनिज संपदा की दृष्टि से मध्यप्रदेश देश के आठ प्रमुख खनिज सम्पन्न राज्यों में से एक है। प्रदेश का कोयला के सकल उत्पादन में राष्ट्र में चौथा स्थान है।

·        परिवहन :- लोक निर्माण विभाग द्वारा संधारित कुल सड़कों की लम्बाई 70.95 हजार, राष्ट्रीय राजमार्गो की लंबाई 8.85 हजार तथा प्रांतीय राज मार्गों की लंबाई 11.39 हजार किलोमीटर रही है।

3.     व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी

·        जनवरी 2023 में आयोजित इस कार्यक्रम के 7वें संस्करण में निवेश के लिए रु 15.42 लाख करोड़ के इन्टेन्ट ऑफ इन्वेस्मन्ट प्राप्त हुए।

·        मध्यप्रदेश ट्रैड प्रमोशन कॉउन्सिल बेहतर व्यापार विकास के लिए आठ औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की गई है जो की इस प्रकार हैं:-

o   खाद्य प्रसंस्करण (2) तकनीकी टेक्सटाइल (3) टेक्सटाइल (4) फार्मास्यूटिकल (5) वस्त्र निर्माण (6) ऑटोमोबाइल और सहायक (7) रक्षा (8) नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित उपकरण विनिर्माण।

·        पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में वर्ष 2021-22 में मध्यप्रदेश के निर्यात में 21% की वृद्धि हुई है। वर्ष 2017-18 से भारत का निर्यात 6.9% की वार्षिक औसत वृद्धि दर से बढ़ रहा है जबकि इसी अवधि के दौरान मध्यप्रदेश से निर्यात की वार्षिक औसत वृद्धि दर 8.4% थी

·        मध्यप्रदेश के लिए 42 उत्पादों को "चैंपियन उत्पादों" के रूप में पहचाना गया है, जिनमें से 14 उत्पाद चैंपियनों में भारत के निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 30% से अधिक है।

·        देश के कुल निर्यात में मध्यप्रदेश का हिस्सा वर्ष 2021-22 में 1.9% हो गया है।

4.     सार्वजनिक वित

·        वित्तीय वर्ष 2004-05 से लगातार 14 वर्षों तक राजस्व अधिशेष में रहने के बाद, प्रतिकूल आर्थिक वातावरण के कारण मध्यप्रदेश राज्य में, वर्ष 2019-20 में राजस्व घाटा हुआ। कोविड-19 के कारण, राजस्व घाटा वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 पुनरीक्षित अनुमान में भी जारी रहा।

·        प्रमुख राजकोषीय संकेतक वर्ष 2022-23 (बजट अनुमान) (रूपए करोड़ में)

राजस्व घाटा

3736

राजकोषीय घाटा

52511

प्राथमिक घाटा

30344

GSDP के % के रूप में

(वर्ष 2022-23 बजट अनुमान )

राजकोषीय घाटा

4.56

राजस्व घाटा

0.32

                                              (मध्यप्रदेश एफ.आर.बी.एम. 2022 रिपोर्ट के अनुसार)

 

·        राज्य सरकार की कुल प्राप्तिया

राजस्व प्राप्तियां

195179

जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में राजस्व प्राप्तियां

16.96

 

5.     FDI  (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) – किसी भी विदेशी कंपनी / व्यक्ति द्वारा भारत में स्वयं के उपक्रम या भारतीय उपक्रम में निवेश करने की प्रक्रिया ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कहलाती है

·        FDI आकर्षित करने वाले राज्यों में म.प्र. का स्थान भारत में 13वें क्रम पर है  

ü भारत में कुल FDI (2022-23) 71 बिलियन $ तक निवेश प्राप्त हुआ

ü म.प्र. में FDI 1560 करोड़ रु.(देश के कुल FDI का 0.38% है)

6.     क्रय शक्ति समता (P.P.P.) – देश विदेश में उपलब्ध मुद्राओ द्वारा समान उत्पाद की कीमतों का अंतर ही क्रय शक्ति क्षमता कहलाता है

·        यह अंतर्राष्ट्रीय विनिमय का एक सिद्धांत है।

·        इसका अर्थ किन्हीं दो देशों के बीच वस्तु या सेवा की कीमत में मौजूद अंतर से लिया जाता है।

·        क्रय शक्ति समता के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि दो देशों के बीच मुद्रा की क्रयशक्ति में कितना अंतर या फिर समता मौजूद है।

·        इसी आधार पर भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है

·        म.प्र. भारत की क्रय शक्ति में 4.6% का योगदान रखता है

 

 

                                            निर्यात – कुल निर्यात (अरब डॉलर में)

2022-23

2023-24 /आकलन

575.79

565.04

 

·        म.प्र. देश के निर्यात में 2% (1.9%) लगभग योगदान देता है

·        प्रदेश में 42 उत्पाद चैम्पियन उत्पाद घोषित किये गए है

·        कुल निर्यात में प्रदेश 10वें स्थान पर है

 

7.     जीवन प्रत्याशा – किसी देश में नागरिको/ लोगो के जीवित रहने की औसत अवधि जीवन प्रत्याशा कहलाती है

 

एक व्यक्ति के औसत जीवनकाल का अनुमान / जीवन प्रत्याशा वर्ष 2021-2025

 

भारत

मध्यप्रदेश

पुरुष

69.4

66.7 (न्यूनतम )

महिला

72.7

68.5

 

·        भू-जल विकास रिपोर्ट 2022

म.प्र. – 59.10%

                                                    वृद्धि दर   

       भारत – 60.08%

·        बैंकिंग तथा संबंधी संस्थान –

भारत

म.प्र.

सार्वजनिक बैंक- 12

अनुसूचित बैंक -34

निजी बैंक – 22

क्षेत्रीय बैंक -2

शहरी सहकारी बैंक -1485

राज्य सहकारी बैंक -1

ग्रामीण सहकारी बैंक -9600

जिला सहकारी बैंक -38

2022 में समग्र ऋण में वृद्धि – 16.9%

भुगतान बैंक – 3

कुल ऋण का 40% प्राथमिक क्षेत्र में

2022 में समग्र ऋण वृद्धि -15.6% रही

कृषि ऋण का वार्षिक औसत – 18%

कुल ऋण का 59.41% प्राथमिक क्षेत्र में

 

कृषि हेतु कुल ऋण का 32.2%

 

8.     मिशन अमृत सरीवर –

·        शुभारम्भ – 15 अगस्त 2023

·        उद्देश्य –प्रति जिला 75 अमृत सरोवर निर्माण , देश में कुल 50000 तालाब का निर्माण

·        मध्यप्रदेश में 5000 से ज्यादा अमृत सरोवर बन चुके है तथा प्रदेश इस मिशन में द्वितीय स्थान पर है

9.     पी.एम. स्वनिधि –

·        शुभारम्भ1 जून 2020

·        प्रथम चरण में 10000 रु. ऋण देकर प्रदेश ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है

·        हितग्राही – हाथठेला लगाने वाले स्ट्रीट वेंडर्स

·        द्वितीय चरण – 20000 रु.

·        तृतीय चरण – 50000 रु. दिए जायेगे

10.  जल जीवन मिशन –

·        शुभारम्भ – 15 अगस्त 2023

·        उद्देश्य – 2024 तक 55ली. प्रति व्यक्ति प्रतिदिन शुद्ध पेयजल हेतु घरेलू नल कनेक्शन प्रदायगी सुनिश्चित करना है

·        म.प्र. इसके क्रियान्वयन में 5वें स्थान पर है

·        म.प्र. के 3 जिले बुरहानपुर इंदौर तथा निवाड़ी 100% नल कनेक्शन युक्त जिले है

11.  प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) –

·        शुभारम्भ – 1 अप्रैल 2016

·        म.प्र. इसके क्रियान्वयन में प्रथम स्थान पर है

·        2022-23 में 7.18 लाख आवास पूर्ण किए

·        प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में प्रदेश का द्वितीय स्थान है

12.  स्मार्ट सिटीज मिशन – (म.प्र. का स्थान)

·        इंडिया स्मार्ट सिटी अवार्ड्स 2022 में स्मार्ट सिटीज मिशन में इंदौर को सर्वश्रेष्ठ शहर और मध्य प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य का नाम दिया।

·        पशुपालक क्रेडिट कार्ड वितरण में म.प्र. का स्थान -प्रथम है

·        दिव्यांग UID निर्माण में प्रदेश का स्थान प्रथम

·        आयुष्मान कार्ड बनाने में प्रथम स्थान है

·        प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की राशि वितरण में प्रदेश का प्रथम स्थान है

·        स्टेट एनर्जी एंड क्लाइमेट इंडेक्स (नीति आयोग) में प्रदेश 19वें स्थान पर है

·        ईज ऑफ़ डूइंग इंडेक्स में एचीवर्स श्रेणी में प्रदेश शामिल है

 

13.   SDG – 15 (भूमि पर जीवन)

·        प्रकाशन – नीति आयोग द्वारा SDG इंडिया इंडेक्स 3.0 (2020-21) में मध्यप्रदेश का दूसरा स्थान है

 

फसल क्षेत्र में योगदान (आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23, भारत):

फसल का नाम

देश में म.प्र.का स्थान

दलहन

1

कुल मसाले

1     (मसाला बोर्ड, कृषि मंत्रालय 2023 के अनुसार )

सोयाबीन

2   (भारतीय आर्थिक सर्वे. 2022-23)

       (मप्र आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार  सर्वाधिक उत्पादन- मप्र का है)

तिलहन

2

कुल खाद्यान्न

2

गेहूं

2

सब्जियां

3

फूल / पुष्प

4

 

वनीय अर्थव्यवस्था में प्रदेश का स्थान –

·        कुल वन क्षेत्र 77492 (वनावरण में देश में प्रथम)

·        भारत की कुल वन भूमि का 10.8%

·        सुशासन सूचकांक रिपोर्ट 2020-21 के अनुसार, सुशासन सूचकांक में ग्रुप बी के राज्यों में प्रथम स्थान प्रदेश का है

 

लॉजिस्टिक्स सुगमता –

·        DPIIT रिपोर्ट लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक 2023:

रिपोर्ट में केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि को "फास्ट मूवर्स" के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

·        म.प्र. तीव्रगामी आकांक्षी राज्य की श्रेणी में शामिल है

·        निर्यात तैयारी सूचकांक में प्रदेश का स्थान देश में 12वां है

·        प्रमुख निर्यातित वस्तुएँ (म.प्र.में) - दवा (प्रथम), कपास व सूती धागा (द्वितीय), रेडीमेड वस्त्र (तृतीय)

विश्व बैंक द्वारा जारी लॉजिस्टिक प्रदर्शन सूचकांक (LPI) 2023

·        139 देशों के सूचकांक में भारत 38वें स्थान पर है।

·        लॉजिस्टिक से संबंधित भारत की पहलें:

Ø अक्तूबर 2021 में सरकार ने PM गति शक्ति पहल

Ø

ई- गिरदावरी परियोजना

·        इसमें म.प्र. का प्रथम स्थान पर है

·        ई-गिरदावरी: MP किसान एप द्वारा कृषक अपनी फसल स्वयं दर्ज कर सकते है।

·        भू-अभिलेख निर्माण कर भूमि स्वामी को हक़ देने में म.प्र. अग्रणी है

प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 में राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति (NLP) की शुरुआत की

Ø माल का बहुविध परिवहन अधिनियम, 1993

Ø मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क 2017 में

Ø डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर 2006 में शुरू

Ø सागरमाला परियोजना 2015

Ø भारतमाला परियोजना 2015

 

जल प्रबंधन में योगदान –

·        जून 2023, मध्यप्रदेश को देश में जल, संरक्षण, संवर्धन और मानव जीवन के लिए जल के उपयोग में सबसे बेहतर काम करने पर सर्वश्रेष्ठ राज्य का राष्ट्रीय जल पुरुस्कार प्रदान किया।

·         नीति आयोग रिपोर्ट में गैर हिमालयी राज्यों में मध्यप्रदेश तीसरे स्थान पर है

·        केन्द्रीय जल आयोग के निगरानी नेटवर्क  में शामिल 143 जलाशयों में से 11 जलाशय म.प्र. के है

·        AI आधारित मिशन लर्निंग द्वारा जल प्रबंधन में प्रथम स्थान पर है

·        एनीमिया मुक्त भारत अभियान के क्रियान्वयन में भी प्रदेश प्रथम स्थान पर है

 

 

मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण आकड़े (2021-22)-

·       
मौजूदा कीमतों और स्थिर कीमतों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP 2011-12)-

 

·        मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि प्रधान है और यह एक दशक से अधिक समय से कृषि और संबद्ध क्षेत्र के विकास में चैंपियन है।

·        प्रभावशाली कृषि विकास दर के कारण, मप्र पिछले 7 वर्षों से लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त कर रहा है।

·        राज्य ने निवेश आकर्षित करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, 30 दिनों में व्यवसाय शुरू करने के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं को सरल बनाया है और इसके लिए एक ऑनलाइन प्रणाली स्थापित की है। इन प्रयासों के कारण, राज्य की विभिन्न सूचकांको में स्थिति है-

·        2024 में लोकसभा चुनाव के चलते डॉ. मोहन यादव सरकार वित्त वर्ष 2024-25 के लिए चार माह के लिए लेखानुदान लेकर आई है।

·        वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में 1 लाख 45 हजार करोड़ रुपये का अंतरिम बजट पेश किया।  1 अप्रैल से 31 जुलाई 2024 तक के खर्च और योजनाओं के लिए राशि का आवंटन किया गया है।

 

·        उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अनुसार मध्य प्रदेश 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सूची में चौथे स्थान पर है

·        एसडीजी (सतत विकास लक्ष्य) इंडिया इंडेक्स (2020-21) में मध्यप्रदेश का स्थान 17वां है

·        मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड को नई दिल्ली में 96वें स्कोच शिखर सम्मेलन में ग्रामीण पर्यटन परियोजना के लिए पर्यटन श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 


 

2. मध्यप्रदेश की जनसंख्या व मानवीय संसाधनों का विकास- शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल


मध्यप्रदेश की जनसंख्या

·       

कुछ अन्य तथ्य :

·        Demography (जनांकिकी) का पहली बार वैज्ञानिक अध्ययन ‘जॉन ग्राउण्ट' द्वारा किया गया, इसलिए इन्हें Father of Demography कहा जाता है l

·        जनगणना सम्बन्धी समस्याओं का अध्ययन सर्वप्रथम माल्थस द्वारा किया गया |

·        माल्थस के अनुसार प्रति 25 वर्ष बाद किसी देश की जनसंख्या दुगनी हो जाती है |

·        विश्व में सबसे पहले जनगणना कराने वाला देश – स्वीडन (1748-49)

·        सबसे पहले नियमित जनगणना कराने वाला देश – USA (1790)

जनसंख्या संघ सूची का विषय है।

·        भारत की जनगणना के साथ - साथ मध्यप्रदेश की जनगणना सर्वप्रथम 1872 में लार्ड मेयो के समय हुई।

·        नियमित जनगणना 1881 में लार्ड रिपन के समय में प्रारंभ हुई।

·        भारत की जनगणना, जनगणना अधिनियम, 1948 के अनुसार की जाती है।

·        जनसंख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश भारत का छठवाँ राज्य है।

·        आंध्रप्रदेश से तेलंगाना के गठन के बाद मध्यप्रदेश 5 वें स्थान पर आ गया है।

·        भारत की कुल जनसंख्या का 6% म.प्र. में है।

·        मध्यप्रदेश का कुल क्षेत्रफल 3,08,252 वर्ग किमी भारत के कुल क्षेत्रफल का 9.38% है।

·        2011 की जनगणना के आयुक्त श्री सी. चंद्रमौली थे।

·        2011 की जनगणना मध्यप्रदेश की छठवीं एवं देश की 15 वीं जनगणना थी।

·        मार्च 2011 में जनगणना पूर्ण हुई एवं दिसम्बर 2013 में अंतिम आंकड़े जारी किये गये थे।

·        विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 1988 से मनाया जा रहा है।

·        विश्व ने 6 अरब जनसंख्या 12 अक्टूबर, 1999 तथा 7 अरब जनसंख्या 31 अक्टूबर, 2011 को पूरी की।

·        मध्यप्रदेश जनसंख्या नीति 11 मई, 2000 को घोषित की गई इसलिए मध्यप्रदेश 11 मई को जनसंख्या नियंत्रण दिवस के रूप में मनाता है।

·        मध्यप्रदेश में पहला जनगणना अभियान वर्ष 1951 में श्री जे. डी. केरवल्ला, आई.ए.एस., तत्कालीन अधीक्षक जनगणना कार्य, के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। वर्ष 1995 तक कार्यालय का संचालन निजी भवनों से होता था। 18 अक्टूबर1995 के शुभ दिन यह कार्यालय वर्तमान "जनगणना भवन" अरेरा हिल्स में स्थानांतरित हो गया

·       

जनसंख्या एवं जनसंख्या घनत्व

 


भारत में जनगणना एक संघीय विषय (अनुच्छेद 246) है और संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुक्रमांक 69 पर सूचीबद्ध है। जनगणना अधिनियम, 1948 स्वतंत्र भारत में जनगणना के संचालन के लिए कानूनी आधार बनाता है।

 

Ä

n  मध्यप्रदेश की जनसंख्या

                    i.            कुल जनसंख्या – 7,26,26,809

                  ii.            पुरुष जनसंख्या – 3,76,12,306 (कुल जनसंख्या का 51.78%)

                iii.            महिला जनसंख्या – 3,50,14,503 (कुल जनसंख्या का 48.22%)

जनसंख्या

n  भारत की सर्वाधिक जनसख्या वाले राज्य

1)      उत्तरप्रदेश (19.9 करोड़)

2)      महाराष्ट्र (11.23 करोड़)

3)      बिहार (10.38 करोड़)

4)      प. बंगाल (9.13 करोड़)

5)     

n  मध्यप्रदेश की न्यूनतम जनसंख्या वाले जिले

a)       निवाड़ी (4.04 लाख)

b)      आगर-मालवा (4.80 लाख)

c)       हरदा

मध्यप्रदेश (7.26 करोड़)

n  मध्यप्रदेश की सर्वाधिक जनसंख्या वाले जिले

                                                              i.      इंदौर (32.76 लाख

                                                            ii.      जबलपुर (24.63 लाख)

                                                          iii.      सागर (23.78 लाख)

                                                           iv.      भोपाल (23.71 लाख)

                                         v.    रीवा (23.65 लाख)

n 

ग्रामीण जनसंख्या - 72.37%

शहरी जनसंख्या - 27.63%

मध्यप्रदेश की सर्वाधिक जनसंख्या वाले शहर /नगर

1.       इंदौर (19.94 लाख)

2.       भोपाल (18 लाख)

3.       जबलपुर

4.       ग्वालियर

5.       उज्जैन

Ä दशकीय जनसंख्या वृद्धि

§  भारत में 2011 में दशकीय जनसंख्या वृद्धि – 17.7%

§  म.प्र. में 2001 में दशकीय जनसंख्या वृद्धि – 24.3%

§  म.प्र. में 2011 में दशकीय जनसंख्या वृद्धि – 20.35%

§  जनसंख्या वृद्धि दर की दृष्टि से म.प्र. का देश में 13वां क्रम है।

 

म.प्र. के सर्वाधिक दशकीय जनसँख्या वृद्धि वाले जिले

1)      इंदौर (32.9%)

2)      झाबुआ (30.7%)

3)      भोपाल (28.6%)

4)      सिंगरौली (28.0%)

5)      बड़वानी (27.6%)

म.प्र.के न्यूनतम दशकीय जनसँख्या वृद्धि वाले जिले

1.       अनूपपुर (12.3%)

2.       बैतूल (12.9%)

3.       छिंदवाडा (13.1%)

4.       मंदसौर (13.2%)

5.       बालाघाट (13.6%)

मध्यप्रदेश में दशकीय जनसंख्या वृद्धि

नोट : प्रदेश में सर्वाधिक दशकीय वृद्धि दर  1961 से 1971 के बीच 29.28% रही  रही।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


n  न्यूनतम जनसंख्या वाली तहसील

a)       रौन (भिंड)

n  सर्वाधिक जनसंख्या वाली तहसील

1.       इंदौर

2.       भोपाल

3.       ग्वालियर

4.       जबलपुर

 

Ä जनसंख्या घनत्व

w  भारत 2011 में जनसंख्या घनत्व     – 382 /किमी2

w  म.प्र. में 2001 में जनसंख्या घनत्व  – 196 /किमी2

w  म.प्र. 2011 में जनसंख्या घनत्व     – 236 /किमी2

w  जनसंख्या घनत्व की दृष्टि से म.प्र. का देश में 23वां स्थान है।

l 

l  म.प्र. के न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाले जिले

1.       डिंडोरी (94 /किमी2)

2.       श्योपुर (104 /किमी2)

3.       पन्ना (142 /किमी2)

4.       बैतूल, रायसेन, सिवनी (157 /किमी2)

5.       उमरिया (158 /किमी2)

 

म.प्र. के सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाले जिले

1.       भोपाल (855 /किमी2)

2.       इंदौर (841 /किमी2)

3.       जबलपुर (473 /किमी2)

4.       ग्वालियर (446 /किमी2)

5.       मुरैना (394 /किमी2)

 

क्षेत्रफल(2011)

 


भारत के सर्वाधिक क्षेत्रफल वाले राज्य

1.       राजस्थान (3.42 लाख किमी2)

2.       मध्यप्रदेश (3.08 लाख किमी2)

3.       महाराष्ट्र (3.07 लाख किमी2)

4.       उत्तरप्रदेश (2.40 लाख किमी2)

5.       गुजरात (1.96 लाख किमी2)

मप्र के सर्वाधिक क्षेत्रफल वाले जिले

1.       छिंदवाड़ा (11,815 किमी2)

2.       शिवपुरी (10,278 किमी2)

3.       सागर (10,252 किमी2)

4.       बैतूल (10,043 किमी2)

5.       सिवनी (8,752 किमी2)

म.प्र. के न्यूनतम क्षेत्रफल वाले जिले

1.       दतिया (2,691 किमी2)

2.       भोपाल (2,772 किमी2)

3.       अलीराजपुर (3,182 किमी2)

4.       हरदा (3,334 किमी2)

5.       बुरहानपुर (3,427 किमी2)

आगर का क्षेत्रफल - 2,785 किमी2

निवाड़ी का क्षेत्रफल - 1,317 किमी2


 

 

साक्षरता

 

 

 

 


§  मध्यप्रदेश का एकमात्र हिंदी भाषी पूर्ण साक्षर जिला - नरसिंहपुर

§ 

शहरी साक्षरता प्रतिशत – 82.85%

ग्रामीण साक्षरता प्रतिशत - 63.94%

म.प्र. और भारत में सबसे कम साक्षरता वाला जिला - अलीराजपुर

§  भारत में 2011 में साक्षरता प्रतिशत /दर – 73%

§  म.प्र. में 2011 में साक्षरता प्रतिशत /दर – 69.3%

§  म.प्र. में 2001 में साक्षरता प्रतिशत /दर – 63.7%

§  म.प्र. में पुरुष साक्षरता - 78.73%

§ 

m म.प्र. के न्यूनतम साक्षरता वाले जिले

i)         अलीराजपुर (36%)

ii)       झाबुआ (43.3%)

iii)      बड़वानी (49.1%)

iv)      श्योपुर (57.4%)

v)        धार (59%)

 

म.प्र. में महिला साक्षरता - 59.22%

m म.प्र. के सर्वाधिक साक्षरता वाले जिले

1)      जबलपुर (81.8%)

2)      इंदौर (80.9%)

3)      भोपाल (80.4%)

4)      बालाघाट (77.1%)

5)      ग्वालियर (76.7%)

m म.प्र.के न्यूनतम पुरुष साक्षरता वाले जिले

i)         अलीराजपुर (42%)

ii)       झाबुआ (52.9%)

iii)      बडवानी (55.7%)

iv)      धार (68.9%)

v)        श्योपुर (69.3%)

 

m मप्र के सर्वाधिक पुरुष साक्षरता वाले जिले

1.       इंदौर (87.5%)

2.       जबलपुर (87.3%)

3.       भोपाल (85.5%)

4.       भिंड (85.4%)

5.      

m म.प्र. के न्यूतनम महिला साक्षरता वाले जिले

a)       अलीराजपुर (30.3%)

b)      झाबुआ (33.8%)

c)       बडवानी (42.2%)

d)      श्योपुर (42.4%)

e)       सिंगरौली (48.8%)

 

बालाघाट (85.3%)

m मप्र के सर्वाधिक महिला साक्षरता वाले जिले

1)      भोपाल (74.9%)

2)      जबलपुर (74.9%)

3)      इंदौर (74%)

4)      बालाघाट (69%)

5)      ग्वालियर (67.4%)

 

महिला साक्षरता में वृद्धि:

·        भारत में महिला साक्षरता दर में पिछले दशक में 10.9 प्रतिशत अंक (ग्रामीण 11.8 प्रतिशत अंक और शहरी 6.2 प्रतिशत अंक) की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

·        मध्य प्रदेश में महिला साक्षरता दर में पिछले दशक में 8.9 प्रतिशत अंक (ग्रामीण 9.6 प्रतिशत अंक और शहरी 6.0 प्रतिशत अंक) की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

 

 

 

 

लिंगानुपात

 


 

w  भारत में 2011 में लिंगानुपात – 943

w  म.प्र. में 2001 में लिंगानुपात – 919

w  म.प्र. में 2011 में लिंगानुपात – 931

w  म.प्र. में ग्रामीण लिंगानुपात – 936

w  म.प्र. में शहरी लिंगानुपात – 918

w  मध्यप्रदेश में शिशु लिंगानुपात – 918

w  सर्वाधिक लिंगानुपात वाला संभाग – शहडोल संभाग

w 

म.प्र. के सर्वाधिक लिंगानुपात वाले जिले

1)      बालाघाट (1021)

2)      अलीराजपुर (1011)

3)      मंडला (1008)

4)      डिंडोरी (1002)

5)      झाबुआ (990)

म.प्र. के न्यूनतम लिंगानुपात वाले जिले

i)         भिंड (837)

ii)       मुरैना (840)

iii)      ग्वालियर (864)

iv)      दतिया (873)

v)        शिवपुरी (877)

मध्यप्रदेश में लिंगानुपात


मध्यप्रदेश के 4 जिले ऐसे हैं, जहाँ पर महिलाएँ पुरुषों से ज्यादा हैं।

 

सर्वाधिक ग्रामीण लिंगानुपात

1)      बालाघाट (1024)

2)      अलीराजपुर (1014)

3)      मंडला (1014)

सर्वाधिक शहरी लिंगानुपात

i)        बालाघाट (1000)

ii)      अलीराजपुर (972)

iii)    मंडला (873)

मध्यप्रदेश में ग्रामीण /शहरी लिंगानुपात


 

 

 

म.प्र.के सर्वाधिक शिशु लिंगानुपात वाले जिले

1.                   अलीराजपुर (978 /1000)

2.                   डिंडोरी /मंडला (970 /1000)

3.                   बालाघाट (967 /1000)

म.प्र.के न्यूनतम शिशु लिंगानुपात वाले जिले

1.                   मुरैना (829 /1000)

2.                   ग्वालियर (840 /1000)

3.                   भिंड (843 /1000)

मध्यप्रदेश में शिशु लिंगानुपात (0-6 वर्ष)

मध्यप्रदेश में ग्रामीण व नगरीय जनसंख्या

 


 

r म.प्र. में नगरों की कुल संख्या – 476

ü वैधानिक नगर - 364

ü जनगणना नगर - 112

r

r म.प्र. में न्यूनतम नगरीय जनसंख्या

ü डिंडौरी

 

म.प्र. में सर्वाधिक नगरीय जनसंख्या

ü इंदौर (लगभग 24 लाख)

ü

r न्यूनतम नगरीय जनसंख्या (प्रतिशत में)

ü डिंडौरी (4.6%)

ü अलीराजपुर

ü सीधी

ü झाबुआ

ü सिवनी

ü  

भोपाल

r म.प्र. में सर्वाधिक नगरीय जनसंख्या (प्रतिशत में)

ü भोपाल (80.9%)

ü इंदौर (74.1%)

ü ग्वालियर (62.7%)

ü जबलपुर

ü उज्जैन

r म.प्र. में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर 4 हैं –

ü इंदौर (19,94,397)

ü भोपाल (17,98,218)

ü जबलपुर (10,81,677)

ü ग्वालियर (10,54,420)

r

उज्जैन के बाद बड़े नगर

§  देवास (2.89 लाख)

§  सतना (2.82 लाख)

§  सागर (2.74 लाख)

§  रतलाम

§  रीवा

5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले 5 नगर

इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर के अतिरिक्त

ü उज्जैन (5,15,2015)

l  म.प्र. में कुल गाँव – 54,903

ü कुल आबाद गाँव - 51,929

ü वीरान गाँव - 2,974

w  म.प्र. में सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्या – रीवा (19.5 लाख)

w 

1 लाख से अधिक आबादी वाले शहर -32

म.प्र. में सबसे कम ग्रामीण जनसंख्या – हरदा

w  म.प्र. में सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्या (प्रतिशत में) – डिंडौरी

w  म.प्र. में न्यूनतम ग्रामीण जनसंख्या (प्रतिशत में) – भोपाल

w  म.प्र की ग्रामीण जनसंख्या – 5.256 करोड़ (72.4%)

w  म.प्र की नगरीय जनसंख्या – 2.007 करोड़ (27.6%)

मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति

 


§  म.प्र. का अनुसूचित जाति जनसंख्या की दृष्टि से भारत में 8वां तथा प्रतिशत की दृष्टि से 17वां स्थान है।

§  म.प्र. में अनुसूचित जातियाँ – 48

§  म.प्र. में अनुसूचित जाति – 1.13 करोड़ (15.6%)

§  2011 के अनुसार 15.6% में से 72.89% ग्रामीण एवं 27.11% शहरी जनसंख्या है।

§  अनुसूचित जाति में लिंगानुपात – 920

§  सर्वाधिक लिंगानुपात – बालाघाट (1037)

§  अनुसूचित जाति में साक्षरता दर – 66.16%

मप्र के सर्वाधिक अनुसूचित जाति जनसंख्या प्रतिशत वाले जिले

1.       उज्जैन (26.4%)

2.       दतिया (25.5%)

3.       टीकमगढ़ (25.0%)

4.       शाजापुर (23.4%)

5.       छतरपुर (23.0%)

म.प्र.के न्यूनतम अनुसूचित जाति जनसंख्या प्रतिशत वाले जिले

a)       झाबुआ (1.7%

b)      अलीराजपुर (3.7%)

c)       डिंडोरी (5.6%)

d)      मंडला (5.8%)

e)       बड़वानी (6.3%)

मप्र के सर्वाधिक अनुसूचित जाति जनसंख्या वाले जिले

1)      इंदौर (5.45 लाख)

2)      उज्जैन (5.23 लाख)

3)      सागर (5.1 लाख)

4)      मुरैना (4.2 लाख)

5)      छतरपुर (4.0 लाख)

म.प्र.के न्यूनतम अनुसूचित जाति जनसंख्या वाले जिले

1.       झाबुआ (17.4 हजार)

2.       अलीराजपुर (26.8 हजार)

3.       डिंडोरी (39.7 हजार)

4.       मंडला (48.4 हजार)

5.       उमरिया (87.9 हजार)


 

मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति

 


§  मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति की संख्या – 43 (पूर्व में 46 थी)

§  मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति की कुल जनसंख्या – 1.53 करोड़ (21.1%)

§  2011 के अनुसार 21.09% में से 93.2% ग्रामीण एवं 6.8% शहरी जनजाति जनसंख्या है।

§  शहरी क्षेत्रों में आदिवासियों के निवास की दृष्टि से भिंड जिले का प्रथम स्थान है, यहाँ 76.8% जनजातीय जनसँख्या शहरों में निवास करती है, जबकि डिंडोरी जिला अंतिम स्थान पर है, जहाँ मात्र 1.6% जनजातीय जनसँख्या शहरों में रहती है

§  अनुसूचित जनजाति जनसँख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश का देश में -प्रथम तथा प्रतिशतता की दृष्टि से- 13वां स्थान है

 

 

 

मप्र के सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाले जिले

1.       धार (12.2 लाख)

2.       बडवानी (9.6 लाख)

3.       झाबुआ (8.9 लाख)

4.       छिन्दवाड़ा(7.5 लाख)

म.प्र. के न्यूनतम अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाले जिले

1.       भिंड (6.1 हजार)

2.       दतिया(15 हजार)

3.       मुरैना (17 हजार)

म.प्र. के सर्वाधिक अनु. जनजाति जनसंख्या प्रतिशत वाले जिले

1)      अलीराजपुर (89.0%)

2)      झाबुआ (87.0%)

3)      बडवानी (69.4%)

4)      डिंडोरी (64.7%)

5)      मंडला (57.9%)

मप्र के न्यूनतम अनु. जनजाति जनसँख्या प्रतिशत वाले जिले

1.       भिंड (0.4%)

2.       मुरैना (0.9%)

3.       दतिया (1.9%)

4.       मंदसौर/उज्जैन

/शाजापुर (2.5%)

5.       भोपाल (2.9%)

जनजातीय जनसांख्यिकीय परिदृश्य

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

श्रमिक जनांकिकी परिदृश्य

·        2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में श्रमिकों की कुल संख्या 481.7 मिलियन है। इनमें से 331.9 मिलियन श्रमिक पुरुष और 149.9 मिलियन महिलाएँ हैं। 2001-2011 के दशक के दौरान 79.5 मिलियन श्रमिकों की वृद्धि में से, पुरुष श्रमिकों की संख्या 56.8 मिलियन और महिला श्रमिकों की संख्या 22.7 मिलियन थी।

·        मध्य प्रदेश में श्रमिकों की कुल संख्या 31.6 मिलियन है। इनमें से 20.1 मिलियन श्रमिक पुरुष और 11.4 मिलियन महिलाएँ हैं। 2001-2011 के दशक के दौरान 5.8 मिलियन श्रमिकों की वृद्धि में से, पुरुष श्रमिकों की संख्या 4.0 मिलियन और महिला श्रमिकों की संख्या 1.8 मिलियन थी।

·        मध्य प्रदेश में श्रमिकों ने 22.4% की वृद्धि दर्ज की है, महिला श्रमिकों की वृद्धि 19.0% के मुकाबले पुरुष श्रमिकों में 24.4% की वृद्धि हुई है।

·        मध्य प्रदेश में 247 मिलियन श्रमिक ग्रामीण क्षेत्रों में हैं और 6.9 मिलियन शहरी क्षेत्रों में हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिला श्रमिक क्रमशः 10.0 मिलियन और 1.5 मिलियन हैं।

अन्य स्मरणीय तथ्य

 

ü

मध्यप्रदेश में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर :-

1.       इंदौर

2.       भोपाल

3.       जबलपुर

4.       सागर

5.       ग्वालियर

मध्यप्रदेश में सर्वाधिक कुल कार्य सहभागिता दर डिंडोरी की है।

ü देश में लगभग 6.41 लाख गाँव हैं।

ü मध्यप्रदेश में 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले कुल 33 नगर हैं।

ü भारत में 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले कुल 468 नगर हैं।

ü भारत में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले कुल 53 शहर हैं।

ü प्रदेश का एकमात्र योजनाबद्ध नगर इंदौर है।

 

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य:

·        संस्थागत जन्म 80.8% से बढ़कर 89.1% हो गया है।

·        प्रसवपूर्व देखभाल कवरेज (कम से कम 4 दौरे) 60.9% से बढ़कर 70.2% हो गया है।

·        बचपन में स्टंटिंग 42% से घटकर 37.7% हो गई है, और वेस्टिंग 25.8% से घटकर 17.3% हो गई है।

प्रजनन क्षमता और परिवार नियोजन:

·        कुल प्रजनन दर (टीएफआर) एनएफएचएस-4 (2015-16) में 2.9 से घटकर एनएफएचएस-5 (2019-21) में 2.4 हो गई है।

·        आधुनिक तरीकों के लिए गर्भनिरोधक प्रचलन दर (सीपीआर) 54.9% से बढ़कर 66.1% हो गई है।

·        परिवार नियोजन की अपूर्ण आवश्यकता 17.3% से घटकर 9.4% हो गई है।

मध्य प्रदेश राज्य के लिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) रिपोर्ट की कुछ मुख्य बातें:

जल, स्वच्छता और स्वच्छता:

·        बेहतर पेयजल स्रोत तक पहुंच 91.8% से बढ़कर 93.4% हो गई है।

·        बेहतर स्वच्छता सुविधा तक पहुंच 70.9% से बढ़कर 77.3% हो गई है।

 

महिला सशक्तिकरण:

·        घरेलू निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी 83.4% से बढ़कर 87.2% हो गई है।

·        घर/जमीन पर महिलाओं का स्वामित्व 41.1% से बढ़कर 53.7% हो गया है।

·        महिला साक्षरता दर 59.2% से बढ़कर 66.1% हो गई है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


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           UCC क्या है और क्यों विवादित है ? UCC का मतलब है समान नागरिक संहिता . इसका उद्देश्य विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग नियमों को एक ही नियम से बदलना है। ये नियम शादी , तलाक , संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे मामलों में लागू होते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में UCC का उल्लेख राज्य नीति के निदेशक   सिद्धांत के रूप में किया गया है। यह कहता है कि राज्य भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार नहीं है , बल्कि राज्य के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है। समर्थक कहते हैं कि UCC से देश एकजुट होगा , महिलाओं को अधिकार मिलेंगे और सभी लोगों के साथ समान व्यवहार होगा। लेकिन विरोधी कहते हैं कि इससे धर्म और संस्कृति की विविधता खत्म हो जाएगी। स्वतंत्रता के बाद से ही भारत के संविधान में UCC को लागू करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन इसे लागू करने में अब तक बहुत विवाद और बहस हुई है। UCC के बारे में बा...

क्या प्रशासनिक सेवा की गहरी भूख युवाओं को अपराधिक कृत्य करने की ओर ले जा रही है ?

प्रशिक्षण प्राप्त कर रही आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर के प्रकरण ने देश की प्रशासनिक सेवा की कई संस्थाओं के कारनामों को एक साथ उजागर कर दिया है।  पूजा खेडकर अभी लालबहादुर शास्त्री अकादमी, मसूरी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उनकी यह ट्रेनिंग अगले साल जुलाई में पूरी होगी।  इस दौरान उन्हें फील्ड ट्रेनिंग के लिए असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में पुणे भेजा गया। वहां जाते ही उन्होंने सभी नियम-कायदे और नैतिकता को ताक पर रख ऐसे-ऐसे काम किए, जो देश की पूरी प्रशासनिक सेवा के लिए कलंक कहे जा सकते हैं।  उन्होंने वहां जाते ही लाल बत्ती लगी सरकारी गाड़ी, एक अलग आफिस, घर और चपरासी इत्यादि की मांग की। यहां तक कि अपनी निजी आडी गाड़ी पर खुद ही अवैध रूप से लाल बत्ती भी लगवा ली,  जबकि उस गाड़ी के खिलाफ यातायात नियमों के उल्लंघन के दर्जन भर मामले दर्ज हैं और जुर्माना तक बकाया है। बीते दिनों उसे जब्त कर लिया गया। आईएएस अधिकारी बनने के बाद उन पर ऐसा नशा छाया कि पुणे में तैनात एक अन्य अफसर के कार्यालय से जबरन उनका नाम हटाकर अपनी नेम प्लेट लगा दीं। हालांकि इस प्रकरण के सामने आना एक मायने में सही स...