भारत की प्रमुख व्यापार नीतियां - ये नीतियां न केवल व्यापार के नियम थे, बल्कि उस समय की वैश्विक राजनीति (Geopolitics) का जवाब भी थीं।
1. पहला दौर: "डर और सुरक्षा" (1947 – 1990)
क्या किया: भारत ने अपने दरवाज़े दुनिया के लिए बंद रखे।
क्यों किया: हमें डर था कि विदेशी कंपनियां (जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी) फिर से गुलाम न बना लें। इसलिए नेहरू जी ने "घर में बनाओ" (आयात प्रतिस्थापन) की नीति अपनाई।
विदेश नीति: हम किसी गुट (अमेरिका या रूस) के पीछे नहीं चले, बल्कि गुटनिरपेक्ष (Non-aligned) रहकर अपनी आज़ादी बचाई।
2. दूसरा दौर: "मजबूरी और दोस्ती" (1991 – 2013)
क्या किया: भारत के पास पैसे खत्म हो गए थे, इसलिए मजबूरी में 1991 में दरवाज़े खोलने पड़े (LPG सुधार)।
क्यों किया: अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह ने दुनिया से व्यापार करना शुरू किया।
विदेश नीति: हमने "पूरब की ओर देखो" (Look East) नीति अपनाई और अमेरिका व दक्षिण-पूर्व एशिया से दोस्ती की ताकि देश में पैसा और तकनीक आए।
3. तीसरा दौर: "ताकत और आत्मविश्वास" (2014 – अब तक)
क्या किया: अब भारत केवल सामान खरीदता नहीं, बल्कि "मेक इन इंडिया" के तहत दुनिया को बेचना चाहता है।
क्यों किया: ताकि हम चीन जैसे देशों पर निर्भर न रहें और दुनिया भारत को एक शक्ति (Power) माने।
विदेश नीति: अब भारत अपनी शर्तों पर व्यापार करता है। जैसे—रूस से तेल खरीदना, चीन के RCEP समझौते को ठुकराना और रुपये में व्यापार करना। यह "आत्मनिर्भर भारत" की निडर विदेश नीति है।
एक लाइन में निष्कर्ष: भारत की व्यापार नीति "बचाव" (Defense) से शुरू हुई, "जुड़ाव" (Integration) की तरफ बढ़ी और आज "प्रभाव" (Influence) बढ़ाने का हथियार बन गई है।
चरण 1: नींव और संरक्षणवाद का दौर (1947 – 1980)
उद्देश्य: आत्मनिर्भरता, सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) का प्रभुत्व और विदेशी हस्तक्षेप से बचाव।
| तिथि / वर्ष | नीति (Policy) | प्रतिपादक / प्रमुख व्यक्तित्व | मुख्य विशेषताएं और प्रभाव |
| 6 अप्रैल 1948 | पहली औद्योगिक नीति (First Industrial Policy) | डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (तत्कालीन उद्योग मंत्री) | • भारत के लिए 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' (Mixed Economy) की नींव रखी गई। • उद्योगों को 4 श्रेणियों में बांटा गया, जिसमें राज्य (सरकार) का एकाधिकार था। |
| 15 मार्च 1950 | योजना आयोग का गठन (Planning Commission) | जवाहरलाल नेहरू (प्रधानमंत्री) & पी.सी. महालनोबिस | • सोवियत संघ (USSR) से प्रेरित पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत। • संसाधनों का केंद्रीयकृत आवंटन। |
| 30 अप्रैल 1956 | औद्योगिक नीति संकल्प 1956 (IPR 1956) | जवाहरलाल नेहरू | • इसे "भारत का आर्थिक संविधान" कहा गया। • भारी उद्योगों (Heavy Industries) पर सरकार का पूरा नियंत्रण। • निजी क्षेत्र पर 'लाइसेंस राज' की शुरुआत। |
| 19 जुलाई 1969 | 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण (Bank Nationalization) | इंदिरा गांधी (प्रधानमंत्री) | • बैंकों पर निजी घरानों का कब्जा खत्म करना। • ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों तक ऋण (Loan) पहुंचाना। • "गरीबी हटाओ" एजेंडा का हिस्सा। |
| 1 जनवरी 1974 | फेरा एक्ट (FERA - Foreign Exchange Regulation Act) | इंदिरा गांधी सरकार | • विदेशी मुद्रा (Forex) के संरक्षण के लिए बहुत सख्त कानून। • विदेशी कंपनियों (जैसे Coca-Cola, IBM) को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। |
चरण 2: सुधारों की आहट और बड़ा बदलाव (1980 – 2000)
उद्देश्य: आधुनिकीकरण और अंततः अर्थव्यवस्था को खोलना।
| तिथि / वर्ष | नीति (Policy) | प्रतिपादक / प्रमुख व्यक्तित्व | मुख्य विशेषताएं और प्रभाव |
| 1985-1986 | दीर्घकालिक राजकोषीय नीति (LTFP) | वी.पी. सिंह (वित्त मंत्री, राजीव गांधी सरकार) | • कर दरों (Tax Rates) को तर्कसंगत बनाया गया। • कंप्यूटर और टेलीकॉम क्रांति के लिए आयात नियमों में ढील दी गई। |
| 24 जुलाई 1991 | नई आर्थिक नीति (LPG Reforms) | पी.वी. नरसिम्हा राव (PM) & डॉ. मनमोहन सिंह (FM) | • ऐतिहासिक बदलाव: उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण। • लाइसेंस राज समाप्त। • विदेशी निवेश (FDI) के दरवाजे खोले गए। |
| 1 अप्रैल 1992 | एक्ज़िम नीति (EXIM Policy 1992-97) | पी. चिदंबरम (वाणिज्य मंत्री) | • व्यापार पर लगी पाबंदियां हटाई गईं। • निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मुक्त व्यापार की ओर कदम। |
| 1 जून 2000 | फेमा एक्ट (FEMA - Foreign Exchange Management Act) | यशवंत सिन्हा (वित्त मंत्री, वाजपेयी सरकार) | • सख्त 'FERA' की जगह उदार 'FEMA' लाया गया। • विदेशी मुद्रा उल्लंघन को अब 'अपराध' (Criminal offense) नहीं, बल्कि 'नागरिक उल्लंघन' (Civil offense) माना गया। |
चरण 3: संरचनात्मक सुधार और आत्मनिर्भर भारत (2014 – वर्तमान)
उद्देश्य: विनिर्माण (Manufacturing) हब बनना, डिजिटलीकरण और रणनीतिक व्यापार।
| तिथि / वर्ष | नीति (Policy) | प्रतिपादक / प्रमुख व्यक्तित्व | मुख्य विशेषताएं और प्रभाव |
| 25 सितंबर 2014 | मेक इन इंडिया (Make in India) | नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) | • भारत को Global Manufacturing Hub बनाना। • रक्षा, रेलवे और निर्माण में 100% FDI की अनुमति। |
| 1 जनवरी 2015 | नीति आयोग (NITI Aayog) | नरेंद्र मोदी (अध्यक्ष) | • योजना आयोग को समाप्त कर 'सहकारी संघवाद' (Cooperative Federalism) पर आधारित थिंक-टैंक बनाया गया। |
| 1 जुलाई 2017 | जीएसटी (GST - Goods & Services Tax) | अरुण जेटली (वित्त मंत्री) & जीएसटी परिषद | • "एक देश, एक कर, एक बाजार"। • अप्रत्यक्ष करों (Indirect Taxes) की जटिलता को खत्म किया। इससे इंटर-स्टेट व्यापार आसान हुआ। |
| 12 मई 2020 | आत्मनिर्भर भारत अभियान | नरेंद्र मोदी & निर्मला सीतारमण | • कोविड-19 के बाद घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर। • PLI योजना (Production Linked Incentive): उत्पादन बढ़ाने पर कंपनियों को नकद प्रोत्साहन। |
| 31 मार्च 2023 | नई विदेश व्यापार नीति 2023 (FTP) | पीयूष गोयल (वाणिज्य मंत्री) | • लक्ष्य: 2030 तक $2 ट्रिलियन निर्यात। • ई-कॉमर्स निर्यात हब बनाना। • भारतीय रुपये (INR) में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को मान्यता। |
सारांश: नीतियों का बदलता स्वरूप
1948-1990: नीतियां 'नियंत्रण' (Control) पर आधारित थीं। (श्यामा प्रसाद मुखर्जी, नेहरू, इंदिरा गांधी)।
1991-2014: नीतियां 'सुधार' (Reform) पर आधारित थीं। (नरसिम्हा राव, मनमोहन सिंह, वाजपेयी)।
2014-अब तक: नीतियां 'प्रदर्शन और परिवर्तन' (Perform & Transform) पर आधारित हैं। (नरेंद्र मोदी, अरुण जेटली, पीयूष गोयल)।
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