राजस्थान के जालोर जिले में एक अजीब मामला सामने आया है
नियम क्या है?
तारीख: यह नियम अगले साल यानी 26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस) से लागू होगा
. पाबंदी: बहुएं अब शादियों में, रिश्तेदारों के यहां या किसी कार्यक्रम में स्मार्टफोन लेकर नहीं जा सकतीं
. छूट: अगर उन्हें बात करनी है, तो वे पुराने जमाने वाला 'कीपैड फोन' (बटन वाला फोन) इस्तेमाल कर सकती हैं
. लड़कियों के लिए: जो लड़कियां अभी पढ़ रही हैं, वे घर के अंदर पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन चला सकती हैं, लेकिन उन्हें भी इसे घर से बाहर ले जाने की इजाजत नहीं होगी
.
पंचायत ने ऐसा क्यों किया? पंचायत के बुजुर्गों का कहना है कि:
औरतों को मोबाइल की लत लग रही है
. इसकी वजह से बच्चों की आंखें खराब हो रही हैं
. इसलिए उन्होंने "सर्वसम्मति" (सबकी रजामंदी) से यह फैसला लिया है
.
आम आदमी की नजर में इसमें गलत क्या है? साधारण शब्दों में कहें तो यह 'आजादी छीनने' वाला मामला है.
आज के जमाने में फोन सिर्फ टाइम पास नहीं, बल्कि जरूरत है (बैंकिंग, जानकारी, सुरक्षा के लिए).
आप किसी बालिग (Adult) महिला को यह हुक्म नहीं दे सकते कि वो कौन सा फोन रखे.
यह भेदभाव है क्योंकि आदमियों पर ऐसा कोई रोक-टोक नहीं है, सिर्फ महिलाओं पर है.
संक्षेप में, यह पुराने रीति-रिवाजों और आज के नए जमाने के अधिकारों के बीच की लड़ाई है.
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