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स्वास्थ्य सेवा में PPP मॉडल की जरूरत नहीं है" और यह खतरनाक हो सकता है?

 आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में सरकार नए मेडिकल कॉलेज खोलना चाहती है, लेकिन उसके पास शायद पूरे पैसे नहीं हैं या वो इसे खुद नहीं चलाना चाहती। इसलिए, सरकार ने PPP मॉडल अपनाने का फैसला किया है।

  • प्लान: सरकार अपनी ज़मीन और सरकारी जिला अस्पताल (District Hospitals) प्राइवेट कंपनियों को 33 साल (या 66 साल) की लीज पर दे देगी।

  • बदले में: प्राइवेट कंपनी मेडिकल कॉलेज बनाएगी और चलाएगी।

इस पर अखबार में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव (Former Union Health Secretary) के. सुजाता राव ने एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि "स्वास्थ्य सेवा में PPP मॉडल की जरूरत नहीं है" और यह खतरनाक हो सकता है।


2. सरल भाषा में: PPP मॉडल क्या है?

मान लीजिए आपके पास एक खाली प्लॉट है (सरकार के पास जमीन है), लेकिन आपके पास घर बनाने के पैसे नहीं हैं। आपने एक बिल्डर (प्राइवेट कंपनी) से कहा- "तुम यहाँ घर बनाओ, तुम इसे 30 साल तक किराए पर चलाना और मुनाफा कमाना, बस कुछ कमरे मेरे परिवार (गरीब जनता) के लिए फ्री रखना।" सुनने में यह अच्छा लगता है, लेकिन असलियत में अक्सर बिल्डर मुनाफे के चक्कर में नियमों को ताक पर रख देता है। यही डर स्वास्थ्य क्षेत्र में है।


3. इस मुद्दे के 'हर आयाम' (Dimensions) - विस्तार से

लेखिका ने इस मॉडल की धज्जियाँ उड़ाई हैं। आइये इसके हर पहलू को देखें:

(A) आर्थिक आयाम (Economic Dimension): पढ़ाई महंगी होगी

  • मुद्दा: जब प्राइवेट कंपनी पैसा लगाएगी, तो वो मुनाफा भी कमाना चाहेगी।

  • असर: मेडिकल की पढ़ाई बहुत महंगी हो जाएगी। गरीब और मिडिल क्लास का बच्चा डॉक्टर नहीं बन पाएगा।

  • खतरा: जो छात्र करोड़ों रुपये देकर डॉक्टर बनेगा, वो गाँव में जाकर सेवा क्यों करेगा? वो या तो विदेश जाएगा या शहर में महंगा क्लिनिक खोलेगा ताकि अपना खर्च निकाल सके। इसे "Commercialization of Education" (शिक्षा का बाजारीकरण) कहते हैं।

(B) सामाजिक आयाम (Social Dimension): गरीबों के साथ धोखा?

  • वादा: सरकार कहती है कि प्राइवेट अस्पताल में 70% बेड गरीबों के लिए होंगे (Ayushman Bharat योजना के तहत)।

  • हकीकत (डर): प्राइवेट अस्पताल अक्सर गरीबों को भर्ती करने से मना कर देते हैं। वे कह सकते हैं कि "बेड खाली नहीं है" और उन बेड्स को अमीर मरीजों को (जो नकद पैसे देंगे) दे देंगे। इसे रोकने के लिए सरकार के पास मजबूत तंत्र नहीं है।

(C) प्रशासनिक आयाम (Administrative Dimension): सरकार की कमजोरी

  • तर्क: भारत में सरकार के पास इतनी क्षमता (Capacity) नहीं है कि वो प्राइवेट कंपनियों की रोज-रोज निगरानी कर सके।

  • जोखिम: अगर प्राइवेट कंपनी कल को दिवालिया हो गई या भाग गई, तो अस्पताल का क्या होगा? अंत में जिम्मेदारी सरकार पर ही आ गिरेगी, और तब तक जनता का नुकसान हो चुका होगा। अदालतों में केस बरसों चलते हैं।

(D) स्वास्थ्य तंत्र का आयाम (Systemic Dimension): चेन टूट जाएगी

  • समस्या: सरकारी जिला अस्पताल (District Hospital) स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ होते हैं। अगर इन्हें प्राइवेट हाथों में दे दिया गया, तो "रेफरल सिस्टम" टूट जाएगा। (जैसे: गाँव के छोटे अस्पताल से मरीज को जिला अस्पताल भेजना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि वहां अब प्राइवेट मालिक बैठा है)।


4. Political Science & UGC NET Perspective (Notes)

आपके एग्जाम (Political Science - Paper 2) के लिए इस टॉपिक को इन यूनिट्स में फिट करें:

  • Unit 10: Public Policy in India (भारत में लोक नीति):

    • Health Policy: यह "National Health Policy" के खिलाफ जाता है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) को मजबूत करने की बात करती है।

    • Welfare State vs. Privatization: यह एक क्लासिक बहस है। क्या 'कल्याणकारी राज्य' (Welfare State) अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट रहा है? स्वास्थ्य (Article 21 - Right to Life के तहत) राज्य की जिम्मेदारी है, न कि बाजार की।

  • Unit 7: Political Institutions (Federalism):

    • स्वास्थ्य 'राज्य सूची' (State List) का विषय है, लेकिन नीतियां (जैसे NITI Aayog का PPP पर जोर) केंद्र से प्रभावित हो रही हैं।

  • Unit 9: Public Administration (Governance):

    • Accountability (जवाबदेही): PPP मॉडल में जवाबदेही तय करना मुश्किल होता है। इसे "Principal-Agent Problem" कहते हैं (सरकार मालिक है, कंपनी एजेंट है, लेकिन एजेंट मालिक की नहीं सुनता)।

Exam के लिए महत्वपूर्ण शब्दावली (Keywords):

  1. Out-of-pocket Expenditure: जेब से होने वाला खर्च (निजीकरण से यह बढ़ता है)।

  2. Crony Capitalism: आलोचक इसे सरकार और प्राइवेट कंपनियों की मिलीभगत कह सकते हैं।

  3. Institutional Capacity: लेखिका का मुख्य तर्क है कि भारत में "कॉन्ट्रैक्ट लागू करवाने की क्षमता" (Enforcement capacity) कमजोर है।

निष्कर्ष (Conclusion)

सरल शब्दों में निष्कर्ष यह है: स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी अधिकारों को मुनाफे के बाजार (Market) के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। प्राइवेट कंपनी का धर्म 'मुनाफा' है, जबकि सरकार का धर्म 'सेवा' है। जब दोनों मिलते हैं (PPP), तो अक्सर 'सेवा' हार जाती है।

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