विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 (Current Affairs)
यह विधेयक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में अंतिम और निर्णायक कदम है।
1. मुख्य उद्देश्य:
एकल नियामक (Single Regulator): इसका मुख्य लक्ष्य भारत में उच्च शिक्षा के लिए 'एक देश, एक नियामक' (One Nation, One Regulator) की व्यवस्था करना है।
समापन: यह विधेयक UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग), AICTE (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) और NCTE (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) जैसे अलग-अलग निकायों को खत्म करके उन्हें एक ही छत के नीचे लाएगा।
2. विधेयक की प्रमुख विशेषताएं:
चार स्तंभ (Four Verticals): इस नए 'अधिष्ठान' (Commission) के तहत चार स्वतंत्र वर्टिकल होंगे:
NHERC (विनियमन): केवल रेगुलेशन देखेगा (इंस्पेक्टर राज खत्म करना)।
NAC (प्रत्यायन): संस्थानों की ग्रेडिंग (Accreditation) करेगा।
HEGC (अनुदान): फंडिंग और स्कॉलरशिप देखेगा।
GEC (मानक): अकादमिक स्टैंडर्ड तय करेगा।
अपवाद: चिकित्सा (Medical) और कानूनी (Legal) शिक्षा को इससे बाहर रखा गया है।
स्वायत्तता: इसका जोर 'Light but Tight' (हल्का लेकिन सख्त) रेगुलेशन पर है, ताकि यूनिवर्सिटीज को काम करने की आजादी मिले।
भाग 2: भारतीय उच्च शिक्षा का ऐतिहासिक कालक्रम (Static Knowledge)
UGC NET और UPSC के लिए शिक्षा का इतिहास बहुत महत्वपूर्ण है। इसे हम तीन चरणों में देख सकते हैं:
चरण 1: ब्रिटिश काल (Pre-Independence)
1813 का चार्टर एक्ट: पहली बार शिक्षा के लिए 1 लाख रुपये का प्रावधान किया गया।
1835 (मैकाले का विवरण पत्र): अंग्रेजी शिक्षा को माध्यम बनाया गया (Filtration Theory)।
1854 (वुड्स डिस्पैच - Wood's Despatch): इसे भारतीय शिक्षा का 'मैग्ना कार्टा' कहा जाता है। इसने प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक की शिक्षा की रूपरेखा तैयार की।
1857: वुड्स डिस्पैच की सिफारिश पर कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई।
1882 (हंटर आयोग): प्राथमिक शिक्षा पर जोर दिया।
1902 (रैले आयोग): इसी के आधार पर 1904 का भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित हुआ (लॉर्ड कर्जन के समय)।
1917 (सैडलर आयोग): इसने स्कूली शिक्षा को 12 साल (10+2) करने और यूनिवर्सिटी में 3 साल की डिग्री का सुझाव दिया।
1944 (सार्जेंट योजना): भारत में शिक्षा के स्तर को 40 साल में इंग्लैंड के बराबर लाने का लक्ष्य रखा गया था।
चरण 2: स्वतंत्रता के बाद (Post-Independence)
1948-49 (राधाकृष्णन आयोग): इसे 'विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग' भी कहते हैं।
सुझाव: इसी की सिफारिश पर 1956 में UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की स्थापना एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) के रूप में हुई।
1964-66 (कोठारी आयोग): दौलत सिंह कोठारी की अध्यक्षता में।
महत्व: इसने भारतीय शिक्षा का ढांचा (10+2+3) तय किया।
सिफारिश की कि GDP का 6% शिक्षा पर खर्च होना चाहिए।
1968 (प्रथम राष्ट्रीय शिक्षा नीति): कोठारी आयोग पर आधारित।
1976 (संवैधानिक संशोधन): 42वें संशोधन द्वारा शिक्षा को 'राज्य सूची' से हटाकर 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) में डाला गया।
1986 (दूसरी राष्ट्रीय शिक्षा नीति): राजीव गांधी के समय। इसमें 'ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड' और नवोदय विद्यालय की शुरुआत हुई। (1992 में इसमें थोड़ा संशोधन हुआ)।
चरण 3: 21वीं सदी (Current Era)
2009 (RTE Act): शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21A) लागू हुआ।
2020 (NEP - राष्ट्रीय शिक्षा नीति): कस्तूरीरंगन समिति की सिफारिश पर।
लक्ष्य: 2035 तक उच्च शिक्षा में GER (सकल नामांकन अनुपात) को 50% तक ले जाना।
प्रस्ताव: HECI (Higher Education Commission of India) का गठन, जिसे अब 2025 के इस विधेयक द्वारा लागू किया जा रहा है।
UGC NET Political Science के लिए प्रासंगिकता
यह टॉपिक आपके सिलेबस के इन यूनिट्स को कवर करता है:
Unit 10 (भारत में शासन विधि और लोक नीति): शिक्षा नीति, संस्थागत तंत्र और आयोग।
Unit 7 (भारत में राजनीतिक संस्थाएं): सांविधिक निकाय (Statutory Bodies like UGC/NITI Aayog)।
परीक्षा के लिए टिप: प्रश्न अक्सर कालक्रम (Chronology) पर आते हैं (जैसे: वुड्स डिस्पैच -> कोठारी आयोग -> NEP 2020) या फिर यह पूछा जाता है कि UGC की स्थापना किस आयोग की सिफारिश पर हुई थी (उत्तर: राधाकृष्णन आयोग)।
Comments
Post a Comment