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The Hindu (UPSC IAS Edition) - 25 नवंबर 2025 सभी प्रमुख खबरों और संपादकीय (Editorials) का सरल भाषा में विश्लेषण :-

📰 I. मुख्य राष्ट्रीय खबरें (Top National News)

1. मतदाता सूची के डिजिटलीकरण में तेजी, BLOs पर भारी दबाव

खबर क्या है?
चुनाव आयोग (Election Commission) मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए एक विशेष अभियान चला रहा है, जिसे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कहते हैं। इस अभियान के तहत, बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) घर-घर जाकर वोटर्स के फॉर्म (प्रपत्र) इकट्ठा कर रहे हैं और उन्हें डिजिटल कर रहे हैं। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल 10 दिन बचे हैं, और अब तक 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 47% से अधिक फॉर्म ही डिजिटल हो पाए हैं। गोवा इस काम में सबसे आगे है (76.89%), जबकि केरल (23%) और उत्तर प्रदेश (26.6%) काफी पीछे हैं। समस्या यह है कि BLOs पर समय पर काम खत्म करने का बहुत ज़्यादा दबाव है, जिससे केरल के कोट्टायम में एक अधिकारी ने तो तनाव के कारण आत्महत्या की धमकी तक दे दी है।
स्टेटिक तथ्य (Static Facts) – UPSC के लिए
 * संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति देता है, जिसमें मतदाता सूची तैयार करना भी शामिल है।
 * BLOs की नियुक्ति: बूथ लेवल ऑफिसर्स की नियुक्ति जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत की जाती है। वे चुनाव आयोग और आम जनता के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।

2. गोवा सरकार का बाघों की मौजूदगी पर 'यू-टर्न'

खबर क्या है?
गोवा सरकार ने बाघों की मौजूदगी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात बदल दी है। पहले सरकार ने एक कमेटी के सामने कहा था कि राज्य में बाघों की कोई स्थायी आबादी नहीं है, वे केवल आते-जाते हैं। लेकिन अब, महादयी नदी जल विवाद में, गोवा ने तर्क दिया है कि उसके यहाँ बाघों की 'स्थायी आबादी' (Resident Population) है। गोवा का कहना है कि अगर महादयी नदी का पानी रोका गया, तो इससे बाघों के शिकार क्षेत्र (prey base) और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) को नुकसान पहुँचेगा।
गोवा सरकार बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को भी चुनौती दे रही है जिसमें म्हादेई वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व घोषित करने को कहा गया था। सरकार का तर्क है कि ऐसा करने से वहाँ रहने वाले लगभग 1 लाख लोगों को विस्थापित करना पड़ेगा, जिससे सामाजिक अशांति फैल सकती है।
स्टेटिक तथ्य (Static Facts) – UPSC के लिए
 * NTCA: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority) भारत में बाघ संरक्षण के लिए शीर्ष केंद्रीय निकाय है। इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत वैधानिक दर्जा (Statutory Status) प्राप्त है।
 * टाइगर रिजर्व: किसी क्षेत्र को टाइगर रिजर्व घोषित करने पर, उसके कोर क्षेत्र (Core/Inviolate Area) में मानवीय गतिविधियों पर सख़्त रोक लग जाती है।


3. राजनीतिक दलों को ₹2,000 के नकद चंदे पर रोक की याचिका

खबर क्या है?
सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है जिसमें यह माँग की गई है कि राजनीतिक दल ₹2,000 तक के नकद चंदे (Cash donations) को भी स्वीकार न करें। याचिकाकर्ता का तर्क है कि राजनीति में पारदर्शिता (Transparency) बनाए रखने के लिए किसी भी राशि को नकद में नहीं लिया जाना चाहिए, और दलों को अपने सभी दानदाताओं का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।
यह याचिका आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13A के क्लॉज (d) को चुनौती देती है, जो वर्तमान में दलों को ₹2,000 तक नकद चंदा लेने की अनुमति देता है। याचिका में कहा गया है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकद स्वीकार करना मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन है।
स्टेटिक तथ्य (Static Facts) – UPSC के लिए
 * कानूनी छूट: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13A के तहत राजनीतिक दलों को अपने आय स्रोतों पर आयकर से छूट मिलती है।
 * वर्तमान सीमा: वर्तमान में, राजनीतिक दलों को केवल ₹20,000 से अधिक के चंदे के लिए ही दाता का पूरा विवरण (नाम, पता, पैन) सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है।


4. जस्टिस सूर्य कांत ने 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली

खबर क्या है?
जस्टिस सूर्य कांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथ दिलाई। जस्टिस कांत को एक ऐसे न्यायाधीश के रूप में देखा जाता है जो न्यायिक टकराव (confrontation) के बजाय बातचीत और सुलह (Mediation) के ज़रिए विवादों को सुलझाने पर अधिक ज़ोर देते हैं (उदाहरण के लिए, किसान आंदोलन के दौरान)। उनका सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य सुप्रीम कोर्ट में लंबित 90,000 से अधिक मामलों की संख्या को कम करना होगा।
स्टेटिक तथ्य (Static Facts) – UPSC के लिए
 * नियुक्ति: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
 * कार्यकाल: CJI 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रहते हैं।
 * भारतीयता पर ज़ोर: उन्हें ऐसे जज के रूप में सराहा गया है जिन्होंने अपने फैसलों में भारतीय कानूनों और मिसालों (Indian case laws) पर अधिक भरोसा किया, न कि विदेशी फैसलों पर।


📝 II. संपादकीय और विचार (Editorials & Opinions)

1. राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों का विस्तार (Gubernatorial Discretion)

लेख/संपादकीय का सार:
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 143 (राष्ट्रपति द्वारा मांगे गए परामर्श) के तहत अपनी राय दी है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी भी बिल पर फैसला लेते समय राज्यपाल के पास 'विवेक' (Discretionary Power) का अधिकार होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोर्ट ने राज्यपाल के लिए कोई समय-सीमा (Time-line) तय करने से मना कर दिया कि उन्हें कब तक बिल पास करना है।
लेखक (आर. मोहन) का कहना है कि यह राय राज्यपाल की शक्तियों को बहुत बढ़ा देती है और इसे गैर-न्यायिक (non-justiciable) बना देती है। इससे राज्यपाल, खासकर जब केंद्र और राज्य में अलग-अलग दलों की सरकारें हों, तो चुनी हुई सरकार के विधायी कार्यों में अनावश्यक देरी या बाधा डाल सकते हैं।
स्टेटिक तथ्य (Static Facts) – UPSC के लिए
 * अनुच्छेद 200: यह राज्यपाल को बिल पर मंजूरी देने, रोकने या राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने की शक्ति देता है।
 * सरकारिया आयोग: इस आयोग ने केंद्र-राज्य संबंधों पर सिफारिश करते हुए कहा था कि राज्यपाल को बिल पर निर्णय लेने के लिए 6 महीने की समय सीमा होनी चाहिए।
 * संवैधानिक बाध्यता: सामान्यतः, राज्यपाल मंत्रिपरिषद की 'सहायता और सलाह' (Aid and Advice) पर कार्य करते हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस राय ने अनुच्छेद 200 के तहत उनकी विवेकाधीन शक्ति के दायरे को बढ़ा दिया है।


2. श्रम संहिताएं और त्रिपक्षीय परामर्श की आवश्यकता

लेख/संपादकीय का सार:
केंद्र सरकार ने 2019-2020 में 4 श्रम संहिताएं (Labour Codes) पारित की थीं, जो पुराने 29 श्रम कानूनों की जगह लेंगी। इन संहिताओं को लागू करने में देरी हुई है, लेकिन अब ये जल्द लागू हो सकती हैं। ये कोड कारोबार करने में आसानी (Ease of Doing Business) के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
मजदूर यूनियनों की मुख्य चिंता यह है कि इन कोड्स में मजदूरों के हितों की अनदेखी की गई है। लेखक का सुझाव है कि सरकार को इन्हें लागू करने से पहले 'भारतीय श्रम सम्मेलन' (ILC) का सत्र बुलाना चाहिए। ILC एक त्रिपक्षीय मंच है जहाँ मजदूर यूनियनों, नियोक्ताओं (Employers) और सरकार के बीच श्रम कानूनों पर व्यापक चर्चा होती है। प्रधानमंत्री ने पहले व्यापक त्रिपक्षीय परामर्श का वादा किया था, जिसे अब पूरा किया जाना चाहिए।
स्टेटिक तथ्य (Static Facts) – UPSC के लिए
 * त्रिपक्षीय निकाय: भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC), जो 1940 में स्थापित हुआ था, भारत में श्रम संबंधी मामलों पर सलाह देने वाला सर्वोच्च त्रिपक्षीय (सरकार, नियोक्ता, श्रमिक) निकाय है। 2015 के बाद से इसका कोई सत्र नहीं हुआ है।
 * युवा शक्ति: भारत में हर साल लगभग 1.2 करोड़ लोग कामकाजी उम्र में आ जाते हैं, जिसके लिए गैर-कृषि क्षेत्र में सालाना 78.5 लाख नौकरियों की ज़रूरत है।


3. शिक्षा में 'संख्यात्मकता (Numeracy)' का बड़ा अंतर

लेख/विचार का सार:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN) को शिक्षा की नींव माना गया है। लेकिन एक रिपोर्ट (ASER 2024) से पता चलता है कि बच्चों में पढ़ने की क्षमता (साक्षरता) की तुलना में संख्यात्मक कौशल (गणित) में एक बड़ा अंतर है। कक्षा 5 के छात्र जो आसानी से पढ़ लेते हैं, उनमें से केवल 30.7% ही भाग (Division) जैसे बुनियादी गणितीय प्रश्न हल कर पाते हैं।
कारण: गणित एक संचयी (cumulative) विषय है। यदि बच्चे पिछली कक्षा में प्लेस वैल्यू (Place Value) जैसे बुनियादी कॉन्सेप्ट को नहीं समझ पाते हैं, तो आगे चलकर जोड़, घटाव या दशमलव जैसे विषय उनके लिए कठिन हो जाते हैं। इसलिए, शिक्षण बच्चे के वास्तविक सीखने के स्तर के अनुसार होना चाहिए, न कि केवल पाठ्यक्रम (Syllabus) के अनुसार।
स्टेटिक तथ्य (Static Facts) – UPSC के लिए
 * NIPUN Bharat Mission: शिक्षा मंत्रालय ने 2021 में 'निपुण भारत मिशन' शुरू किया, जिसका लक्ष्य 2026-27 तक ग्रेड 3 के अंत तक सभी बच्चों के लिए मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता सुनिश्चित करना है।


4. डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात का भ्रम

लेख/तथ्य का सार:
भारत सरकार अक्सर कहती है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मानक है कि प्रति 1,000 लोगों पर 1 डॉक्टर होना चाहिए।
सच्चाई: यह एक आधिकारिक WHO मानक नहीं है। WHO ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी देश के लिए ऐसा कोई विशिष्ट अनुपात तय नहीं करते हैं। यह अनुपात किसी देश की स्वास्थ्य ज़रूरतों और श्रम बाज़ार की गतिशीलता के आधार पर तय किया जाना चाहिए।
भारत सरकार अक्सर इस अनुपात को हासिल करने के लिए एलोपैथिक डॉक्टरों के साथ-साथ आयुष (AYUSH) चिकित्सकों (आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी) को भी गिनती में शामिल कर लेती है, जबकि केवल एलोपैथिक डॉक्टरों को लेने पर यह अनुपात लगभग 0.7 प्रति 1,000 है। असली समस्या डॉक्टरों की कुल संख्या नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उनके वितरण में भारी असमानता (disparity) है।
स्टेटिक तथ्य (Static Facts) – UPSC के लिए
 * SDG बेंचमार्क: WHO अब स्वास्थ्य कार्यबल को मापने के लिए सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के समग्र सूचकांक जैसे वैश्विक बेंचमार्क का उपयोग करता है।
 * भारत में स्वास्थ्य: स्वास्थ्य संविधान की राज्य सूची (State List) का विषय है, इसलिए स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।

🚀 III. रक्षा, विज्ञान और पर्यावरण (Defence, Science & Environment)

1. INS माहे - नौसेना को मिला 'साइलेंट हंटर'

खबर क्या है?
भारतीय नौसेना में आईएनएस माहे (INS Mahe) को शामिल किया गया है। यह माहे-श्रेणी का पहला एंटी-सबमरीन शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) है, जिसका मतलब है कि यह उथले पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। इसका आदर्श वाक्य (Motto) 'साइलेंट हंटर्स' है। यह जहाज कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया है और इसमें 80% से अधिक स्वदेशी (Made in India) उपकरण लगे हैं।
स्टेटिक तथ्य (Static Facts) – UPSC के लिए
 * आत्मनिर्भरता: INS माहे रक्षा क्षेत्र में भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को आगे बढ़ाता है।
 * अंतर-सेवा तालमेल (Synergy): पहली बार किसी सेना प्रमुख (Army Chief) ने नौसेना के युद्धपोत के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता की, जो तीनों सेनाओं (जल, थल, नभ) के बीच बढ़ते तालमेल और एकीकरण (Integration) को दर्शाता है।


2. ज्वालामुखी राख का बादल भारत में

खबर क्या है?
इथियोपिया में हायली गुब्बी (Hayli Gubbi) ज्वालामुखी के फटने से निकली राख के बादल (Ash clouds) पश्चिमी राजस्थान के रास्ते भारतीय उपमहाद्वीप में घुस गए हैं। यह राख अब मध्य भारत, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की ओर बढ़ रही है। इसके कारण विमानन अधिकारियों को सतर्क रहने और उड़ानों की सुरक्षा जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्टेटिक तथ्य (Static Facts) – UPSC के लिए
 * ज्वालामुखी राख का खतरा: ज्वालामुखी की राख में कांच और चट्टान के छोटे कण होते हैं। ये कण हवा में रहते हैं और विमान के इंजनों में पिघलकर उन्हें जाम कर सकते हैं, जिससे विमानों के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है।

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