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बजट: शिक्षा, स्वास्थ्य व कृषि में शोध का हक़ का पैसा क्यों नही खर्च किया जा रहा है ?

अगर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि में नवीन शोध नहीं करेगे तो देश को विश्व महाशक्ति बना पायेंगे हाँ या नहीं ?

निर्मला सीतारमन ने बजट भाषण में, विकसित भारत अभियान के लिए नौ मुख्य प्राथमिकता क्षेत्र चुने हैं 

और कहा कि ये प्राथमिकताएं विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए ज़रूरी हैं। ये प्राथमिकताएं हैं:-

  1. कृषि में उत्पादकता, 
  2. रोज़गार, 
  3. सामाजिक न्याय, 
  4. विनिर्माण, 
  5. शहरी विकास, 
  6. ऊर्जा सुरक्षा, 
  7. बुनियादी ढांचा, 
  8. नवाचार
  9. अगली पीढ़ी के सुधार 

कृषि

कृषि में व्यापक उत्पादकता और सतत् अनुकूलता हेतु प्रयास तब तक सफल नहीं हो सकते, जब तक उन पर व्यापक और युद्ध स्तर पर शोध न हों। लेकिन सच यह है कि इस घोषणा के बावजूद बजट में कृषि शोध की राशि नगण्य तो रहा ही और लगभग पूर्ववत एवं घटा भी है। जरा सोचें, जिस देश में कृषि विकास दर पिछले वर्ष के 4.7% के मुकाबले वर्ष 2024 में घटकर मात्र 1.4 रह गई हो, उसमें कृषि शोध पर खर्च करना ही एक मात्र विकल्प होना चाहिए।


 

लेकिन कृषि शोध तीव्रता (एआरआई) – शोध राशि और कृषि जीडीपी का अनुपात – जो वर्ष 2008-09 में 0.75% था, वर्ष 2022-23 में घटकर मात्र 0.43 रह गया है। कृषि अर्थशास्त्री मानते हैं कि कृषि शोध में एक रुपया खर्च करने से दस रुपया मिलता है। भारत जैसे देश में नई पर्यावरण अनुकूलित बीज और नई सिंचाई और बुवाई तकनीकी पर काफी काम करना होगा। 



कहने को इस कृषि प्रधान देश में 62% आबादी आज भी कृषि – अर्थव्यवस्था में संलग्न है, लेकिन कृषि उत्पादकता दुनिया के औसत से काफी कम है। यह भी कड़वा सच है कि नीति आयोग की 9वीं शासी परिषद की बैठक में कृषि पर सार्थक चर्चा नहीं हो सकी।

शिक्षा व स्वास्थ्य

कोई भी देश तब तक समृद्ध नहीं हो सकता, जब तक कि उसके युवाओं की प्रगति न हो। तकनीकी-इनोवेशन और मेडिकल-टूरिज्म में भारतीयों की भूमिका पर देश गर्व करता है। हमारे कृषि शिक्षा संस्थानों ने कृषि-क्रांति में अपनी भूमिका निभाई है।हमारी सरकार को आजकल इस बात के लिए काफी आलोचना मिल रही है कि वह स्वास्थ्य और शिक्षा पर बहुत कम पैसे खर्च करती है। दूसरे देशों की तुलना में हम इन क्षेत्रों में बहुत कम खर्च करते हैं।



क्यों कम खर्च होता है?

सरकार कहती है कि हमारे पास पैसे की कमी है। लेकिन माध्यम वर्ग से इतना टैक्स और साथ ही सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए एक अलग तरह का टैक्स भी लगाया है। इस टैक्स को ‘उपकर’ कहते हैं। इसका मतलब है कि इस टैक्स से जो पैसा आएगा, उसे सिर्फ शिक्षा और स्वास्थ्य पर ही खर्च किया जाएगा।

कर और उपकर में क्या अंतर है?

कर:- जब हम कोई सामान खरीदते हैं या सेवा लेते हैं, तो हमें सरकार को कुछ पैसे देने होते हैं। इसे कर कहते हैं। यह पैसा सरकार की आम आय में जाता है और इसे किसी भी काम के लिए खर्च किया जा सकता है।

उपकर:- उपकर भी एक तरह का टैक्स है, लेकिन इसे किसी खास काम के लिए लगाया जाता है। जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए उपकर लगाया जाता है, तो इस पैसे को सिर्फ शिक्षा और स्वास्थ्य पर ही खर्च किया जाएगा।

सरल शब्दों में कहें तो सरकार चाहती है कि हर व्यक्ति पढ़ा-लिखा हो और स्वस्थ रहे। इसके लिए सरकार ने एक अलग तरह का उपकर भी लगाया है। लेकिन फिर भी सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य पर उतना पैसा नहीं खर्च कर रही है जितना खर्च करना चाहिए।

स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर पर एक नज़र: मुख्य बिंदु

उपकर का संग्रह और उपयोग:

  • 2018-19 से नागरिक स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर का भुगतान कर रहे हैं।
  • यह धन विशेष प्रयोजन निधि में नहीं जा रहा है, बल्कि सामान्य राजस्व में मिला दिया जा रहा है।
  • संसद ने उपकर के लिए कानून बनाया है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 के आंकड़े:

  • स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर के लिए 52,732 करोड़ रुपये एकत्र किए गए, लेकिन केवल 46,499 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए शेष अन्य क्षेत्रों में ।
  • 31,788 करोड़ रुपये प्रारंभिक शिक्षा कोष में गए।
  • माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा तथा स्वास्थ्य निधि के लिए आवंटित राशि कम ही रही।


कैग की रिपोर्ट:

  • कैग ने पाया कि उपकर से एकत्रित धन का एक बड़ा हिस्सा सामान्य राजस्व में चला गया।
  • कैग ने सरकारी खातों की अपनी नवीनतम लेखा-परीक्षा रिपोर्ट में पाया है कि केंद्र सरकार ने 2018-19 में विभिन्न उपकरों के माध्यम से एकत्र किए गए लगभग 2.75 लाख करोड़ रुपए में से 1.1 लाख करोड़ से अधिक भारत के समेकित कोश (सीएफआई) में रोक लिए हैं।

परिणाम:

  • स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में निवेश कम हो रहा है।
  • सामाजिक असमानता बढ़ रही है।
  • जनता का सरकार पर विश्वास कम हो रहा है।

आगे की राह:

  • कानूनों में संशोधन करने की जरूरत है।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य उपकर के उपयोग पर स्वतंत्र निगरानी होनी चाहिए व अन्य क्षेत्रों में उपयोग को रोका जाये।
  • जनता को जागरूक करना जरूरी है।
  • भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना होगा।

मुख्य समस्या:

  • उपकर से एकत्रित धन का उपयोग उस उद्देश्य के लिए नहीं हो रहा है जिसके लिए इसे लगाया गया था।

निष्कर्ष:

शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि अनुसंधान पर पर्याप्त निवेश करना भारत के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। सरकार को इन क्षेत्रों के लिए बजट में वृद्धि करनी चाहिए और धन का कुशलतापूर्वक उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए। साथ ही, कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत बदलाव करने की आवश्यकता है।








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