आज अब समय आ गया है कि हम प्रभु राम का स्वागत करें, भारतवर्ष में राम पधारने वाले है। आयोध्या में निर्मित भगवान श्रीराम का मंदिर अभूतपूर्व है और लगभग 450 वर्ष बाद इस मंदिर का पुनर्निर्माण हो रहा है और ये हिन्दु धर्म के अनुयायियों के लिये उनके पिता तुल्य भगवान श्री राम का एक लम्बा सेकड़ों वर्ष का वनवास रहा है। जो अब खत्म होने जा रहा है जिसमे वर्तमान सरकार के अथक प्रयासों का ही फल है
हमें उत्सुकता है बहुत की भव्य मंदिर और श्रीराम की दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रतिमा स्थापित करवाई जाए जिसमें हम आपके साथ है, सरकार के साथ है, क्योंकि श्रीराम आयोध्या वापस आ रहे है। हम बहुत खुश है और धन्य है
और ये भी सोच रहा हूँ की रामराज्य का भी आगमन होगा जहाँ कोई भी बुराई विद्यमान नहीं होगी सब तकलीफे खत्म हो जायेगी, सब कुछ समान होगा 75 वर्ष बाद बाद वाकई स्वतंत्रता का अनुभव होगा
पर मैं भी अपने परमपिता श्री राम से मिलना चाहता हूं कैसे मिलूं?
मैं बहुत बेसहाय होता जा रहा हूं प्रभु, वर्तमान की शासन प्रणाली से कि जिस चीज से मुझे बहुत खुशी मिलने वाली थी कि मंदिर बनेगा और श्रद्धा आस्था से दर्शन करेंगे लेकिन आज उसी पल बैठा हूं भविष्य की, परिवार की, रोजगार की, पेट भरने की चिंता में |
क्या हमारा हक नही हैं प्रभु हमें भी आपके जैसा एक राजा और शासक मिले। जो रामराज्य -आदर्श राज्य का निर्माण करे
लेकिन ऐसा नही हो सकता। क्योंकि सब कुछ जैसा दिखाया जा रहा है वैसा हो नही रहा है सब कुछ धुंधला होता जा रहा है। बस बार बार आपका नाम श्रीराम-श्रीराम बोलकर गुमराह किया जा रहा है। एक अच्छे आदर्श राज्य लाने के सपने दिखा कर, हमारी परिस्थितियाँ बद से बदतर कर दी गयी है। इसकी एक घटना नीचे प्रस्तुत है,
पिछले साल पिताजी की नौकरी भी चली गई समिति प्रबंधक के पद पर पिछले 15 वर्षों से कार्यरत थे और पी.डी.एस. दुकान मे 30वर्ष तक सेल्समेन रहने के बावजूद शीर्ष अधिकारी और बड़े नेता 15 लाख की उनसे रिश्वत मांग रहे थे उन्होंने मना कर दिया इसलिये पद मुक्त कर दिया गया। कारण देखें तो पिताजी के पास स्नातक की डिग्री नही थी इस एवज में आगे नौकरी हेतु ये मजबूरी मे फायदा उठाने का खेल कैसे खेल रहे है जिसमे हम सब देख ही रहे है और पीड़ित भी अभी 6 लोगो के परिवार को कैसे चलाये? और कैसे 15 लाख रुपए रिश्वत देने पर वो डिग्री की अवश्यकता नहीं रहती और नौकरी बनी रहती ये समझ से परे है। खैर जो भी हुआ इससे ये लगता है कि समय के साथ और अनिश्चितताएं बढ़ने वाली है हम मैं बैठे है की अच्छे दिन तो नही पर बुरे दिन ज़रूर आने वाले है।
पहले से चल रही व्यवस्थाएँ भी बंद हो चुकी है, ट्रैन बसो का किराया बहुत ज्यादा हो गया है ट्रैन मे जो भीड़ रहती है लगता है की किराया बढ़ रहा लेकिन ट्रेने नही।
रोज इधर उधर आसपास के शहरों में कमाई करने भी नहीं जा सकता । बड़े शहरों में रहना तो और भी मुश्किल है।
प्रधानमंत्री जी एल बार बहुत शांति से सुनिये तो ज़रा पर्याप्त रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानसिक शांति की घर वापसी भी चाहिये यही सोच के सत्ता में लाये थे
आप भी 10 वर्ष पूरे कर चुके है। कितने ही किसान फसल बर्बादी से, युवा बेरोजगारी से, महिलायें बढ़ते अपराधों (रेप) से जानें गवां रहे है। क्या इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिये? आखिर सरकार इनकी ही तो सेवा करने के लिये बनी है या फिर राजा बनने के लिये? जनता ही खुशहाल नही है तो क्या करेगे आपकी शान और शौकत भरी चीजो का
अपने आपको सेवक बोलने और अच्छे से बनके दिखाने में जमीन-आसमान का अंतर है।
जनता का भी नैतिक हक है कि अगर वो लायक है तो उसे अच्छे से जीवन जीने मिले । ये महंगाई, बेरोजगारी, भुखमरी, जनसंख्या बृद्धि, अपराध से सुरक्षा हमें भी चाहिये ताकि हम भी खुशी खुशी भगवान प्रभु श्री राम के दर्शन कर पाये उनसे मिल पाए।
प्रभु ऐसी नौबत मत लाना कि सरकार के रवैये से उम्मीद खत्म करके देश का हर व्यक्ति असहाय महसूस करने लगे और मरणासन्न हो जाये।
हे राम ! उस स्थिति में या तो आप स्वयं आ जाना या हमें ही इतनी शक्ति दे देना, जिससे कि हम अपनी समस्यायें खुद हो ठीक कर लें।
लगता है अराजकता आने वाली है
ऐसे निष्क्रिय सेवको को जाना होगा
और रामराज्य आना ही होगा
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