भारत में हिंदी राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त करने के लिए लंबित स्थिति में है। जिसमे सबसे बड़ा योगदान दक्षिण भारतीय राज्यों का है। इसके समाधान के लिए हम एक नई अवधारणा को अपना सकते है वो है:-
" त्रि-भाषा सूत्र" ।
इसके माध्यम से किसी भी दक्षिण भारतीय भाषा (जैसे तमिल) को तृतीय भाषा के रूप मे अनिवर्यतः उत्तर भारतीय राज्यो (मप्र, उप्र, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र इत्यादि) में पढ़ाया, समझाया जाए। साथ ही उत्तर भारतीय भाषा मुख्यतः हिंदी को दक्षिण भारतीय राज्यों (तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश इत्यादि) में तृतीय भाषा के रूप में पढ़ाया, समझाया जाए। जिससे दोनों भिन्न संस्कृतियों के बीच एक मेलजोल की भावना का विकास एवं समन्वय बढ़ेगा।
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