क्या हम जानते हैं कि भारतीय संविधान का कोई अनुच्छेद यह प्रावधान करता है कि "कुछ मामलों में काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता का अधिकार, राज्य अपनी आर्थिक क्षमता और विकास की सीमाओं के भीतर, काम के अधिकार, शिक्षा के लिए और बेरोजगारी, वृद्धावस्था के मामलों में सार्वजनिक सहायता प्राप्त करने के लिए प्रभावी प्रावधान करेगा, बीमारी और अपंगता, और अन्य मामलों में राज्य अवांछित आवश्यकता पूरी करेगा" I
यह पढ़कर थोड़ा अजीब लगता है। कि सरकार का ये सब काम भी है वैसे ये सब भारतीय संविधान के भाग 4, अनुच्छेद 41 में व्यवस्थित तरीके से लिखा गया है।
मैं इन सब संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख इसलिये कर रहा हूं क्योंकि इसमें "राज्य " कोई और नहीं बल्कि हमारी केन्द्र और राज्य सरकारें है। आज देश का युवा नेताओं की बोलचाल में "देश का भविष्य " सड़कों पर गुहार लगाए जा रहा है कि आज 75वें वर्ष आजादी के हो गए है कोई हमारी भी सुन लो हमें भी रोजगार के अवसर प्रदान कर दोl युवाओं का हक़ है कि वे भी अच्छी जिंदगी जिए, आजादी से पहले भी वह अंग्रेजों के सिस्टम से धक्के खा रहा था और आज पाखंडी और भ्रष्ट भारतीय सिस्टम से जो तब तक किसी कि मदद नहीं करता जब तक उस सिस्टम में बैठे अधिकारी कर्मचारी अपनी स्वार्थपूर्ति न करले ।
अरे कोई तो समझाओं इस सिस्टम और नेताओं मंत्रियों सरकारों को कि इन बेरोजगारों को इतना मत तड़पाओं कि वे पुनः असहयोग और भारत छोड़ो आंदोलन और सत्याग्रह करने पर मजबूर हो जाए । अनुच्छेद 41 साफ साफ तरीके से यही प्रावधान कि प्रत्येक व्यक्ति को एक सही स्थिति में कार्य करने का और अपनी आजीविका चलाने का अधिकार है लेकिन एक और बात है कि राज्य की आर्थिक क्षमता भी मायने रखती है। अगर क्षमता नहीं है तो सरकारें यह अधिकार देने से मना कर सकती है। आज के परिदृश्य देखे जाएं तो वर्तमान भारत सरकार का संपूर्ण बजट Total expenditures ₹39.45 trillion है एवं Total revenue ₹31.94 trillion है क्या राज्य का प्राथमिक उत्तरदायित्व नहीं है कि वह पहले देश की बुनियादी जरूरतें : शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पोषण इत्यादि की जरूरतें पूरी करे तभी देश के विकास की मजबूत नींव तैयार होगी । नीति निदेशक तत्वों का अनुच्छेद 45 बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है जिसे 2002 में 86वें संविधान संशोधन के बाद संविधान के एक मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21A) के रूप में जोड़ा गया इस लिये आज युवाओं की एक ही महत्वपूर्ण मांग है कि अब रोजगार की बारी है , अब अनुच्छेद 41 की बारी है मौलिक अधिकार बनाए जाने की । और यह माँग कोई इतनी बड़ी और अनावश्यक माँग नहीं है जो पूरी न हो सके इसे बिल्कुल पूरा करवाया जा सकता है। यदि वर्तमान में केन्द्र और राज्य सरकारें अगर अपने खर्चों और घाटों पर थोड़ा बहुत नियंत्रण स्थापित कर लेते है तो।
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