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देवता बनिए (देने वाला बनो, न कि लेने वाला)

थोड़ा अजीब लगेगा की देवता कैसे बन सकते है? लोगों को लगता है कि देवता तो भगवान के प्रतिनिधि होते है जिन्हे मंदिरों में पूजा जाता है वो सबके आराध्य होते है या अन्य कुछ लोक देवता भी होते है जो इंसान अपने अच्छे कर्मों की वजह से मृत्यु के बाद भी पूजे जाते है। बात यह नही है की देवता होते कौन है? लेकिन बात यह जरूर है की दोनों बातों में देवता का अर्थ यही है जो कुछ देता हो या देने का भाव रखता हो और हमेशा अपना जीवन परोपकार में खपा दिया । यह आपको सोचना है की इनमें से किसकी बात हो रही है?
जब हम दूसरों की हर स्थिति - परिस्थिति में और बुरे वक्त में भी मदद करते है और साथ देते है। लेकिन फिर भी अपनी परिस्थितियों और बुरे दौर में खुद को अकेला पाते है, लोगों के साथ होते हुए भी ऐसा लगता है कि ये परिस्थितियां सिर्फ आप को ही प्रभावित कर रही है, कष्ट में डाल रही है और कोई नहीं समझ पा रहा आपको तब उस स्थिति में हमें क्या करना चाहिए ?   

हमें उस वक्त बस एक जगह बैठकर बस यही करना है और सोचना है कि जो हम मदद, सहयोग कर रहे है वह बिल्कुल सही है और हमेशा करते रहेंगे, चाहे कोई हमें बदले में कुछ दे या नहीं। अगर हम भी वही सहयोग, महत्व की उम्मीदें दूसरों से रखेंगे तब हम एक ऐसी स्थिति चले जाएंगे जहां हम एक-दूसरे की उम्मीदें, इच्छाएं पूरी करते हुए सिर्फ स्वार्थ पूर्ति के लिये जुड़ेंगे। अर्थात बस जरूरतें के वक्त ही अपनापन याद आयेगा वो इंसान आत्मिक और वास्तविक रूप से दूर चला जाएगा। यह जुड़ाव, मदद और सहयोग काफी घातक सिद्ध हो सकता है। इसलिये हमें दूसरे से प्रतिक्रिया और फल की चिंता न करते हुए आगे बढ़ते जाना है चाहे कुछ मिले या न मिले, बस बढ़ते जाना है।
 एक महत्वपूर्ण बात का भी हमेशा ध्यान देना है कि हमेशा अपना आत्म सम्मान नहीं खोना है अर्थात जहां कुछ देते वक्त भी आपके स्तर और कीमत को नीचे गिरा रहा है उपकार करने का फल भी दुर्व्यवहार में मिलता हो, तो उस स्थिति में भी हम अपना कर्तव्य न भूलकर बस भलाई और मदद करने में लगे रहना है और उसके बाद, अंत में बस मुस्कराकर यही बोलना है सामने वाले व्यक्ति से, कि "कर्म का फल अवश्य ही मिलता है। और दोनों को मिलेगा अच्छा करने वाले को भी और बुरा करने वाले को भी"
अच्छा व्यवहार और परोपकारी व्यक्तित्व बुरे से बुरे इंसान को भी आत्मबोध करा देता है की वह किस तरह नीचे गिरते जा रहा है, गलत कर रहा है और आत्मग्लानि के कारण बिल्कल आपके प्रति समर्पित हो जाएगा और अच्छे व्यक्ति को अनुसरण करने लग जायेगा। हम अगर मीठी वाणी बोलते रहेंगे तो हमें कड़वे शब्द और गाली देने वाला इंसान भी एक दिन मीठे वचन उच्चारित करने लग जाएगा। ये दुनिया को सबसे प्रभावी शक्तियां है।


इसके अलावा दुनिया की अन्य कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तिगत शक्तियां कौन कौन सी है हम उनके बारे में भी ब्लॉग निर्मित करेंगे।

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