ये जो देश में हिन्दु-मुस्लिम, ब्राम्हण-दलित, मुस्लिम- सिक्ख, और कुछ राज्यों में जैसे मराठों, जाटों, पटेलों, सवर्णों, यादवों, का अपने से दूसरे समुदायों के प्रति जो दुर्भावना, द्वेष और आपसी टकराव ने जिस तरह से अपनी जड़ें जमा ली है और जिस तरह जमकर यह फल- फूल रहा है वह देश के लिए बहुत खतरनाक है |
हमें समझना होगा कि जो हमें जाति धर्म के नाम पर बांट रहे है वे केवल अपने सत्ता में बने रहने के लिए केवल वोट पाना चाहते है और उन्हें हमारे हितों से कुछ हमदर्दी नहीं है । ये आरक्षण का लॉलीपोप इसीलिए पकड़ाया जाता है कि समाज में ये जातिवाद, भेदभाव का मुद्दा बना रहे । हमें समझना होगा कि ये राजनेताओं के लिए रोजगार का साधन मात्र है इसमें आम लोगों , गरीबों का कुछ फायदा नहीं है |
मैनें अमीर इसलिए नहीं लिखा क्योंकि वो किसी भी जाति का हो उसे इस घटिया साधन की उसे कोई आवश्यकता कतई नहीं है, गरीब भी इसे समझता है कि क्या हमारे लिए सही है और क्या गलत है| पर जब बात रोटी, कपड़ा, मकान की आती है तब वह बेबस होकर विभाजित हो जाता है। गौर करने वाली बात यही से शुरू होती है कि क्यों हम इस नफरतों के माहौल में फँस जाते है? ये जाति और धर्म के मामले में । हो सकता है शायद हमें हमारे जाति के अस्तित्व , धर्म के अस्तित्व के खतरे की दुहाई दी जाती हो बल्कि होता भी वास्तव में यही है जो हमें पूर्णतः समझना आवश्यक है।
पिछले कुछ वर्षों से जाति और धर्म से जुडी जो नफरतें फैलाई जा रही है वह हमारे लिए ही खतरनाक है क्योंकि इतिहास गवाह है हमारे भारत में अंग्रेजों ने इसी नफरत को फैलाकर , आपसी फूट डालकर हमें नरसंहार के मार्ग पर धकेल दिया 1946 से लेकर 1950 तक देश में इसी नफरत के कारण खून की नदियाँ बहती रही लेकिन एक बूढ़ा अकेला इसे रोकने के लिए जान पर खेलकर आगे बढ़ता रहा वह था महात्मा गांधी।
इतिहास में कई नरसंहार , लडाईयाँ , हिंसा हुई है जो जातिवाद या धर्मवाद के मुद्दे पर आधारित थी कुछ को इनसे राजनीतिक सामाजिक और आर्थिक लाभ हुआ और कुछ को राजनीतिक सामाजिक आर्थिक हानि भी हुई
पर दोनों ओर से एक पक्ष को अथाह हानि हुई जिसकी गणना असंभव है वह है मानवता,
और दुर्भाग्य से दोनों ओर से आम जनता, गरीब जनता मारी गई । इसलिए हमें कहना और समझना होगा कि हमें जाति धर्म पर बांटने वालों अब और नहीं चलेगा ये मामूली नेता मंत्री होते कौन है हमारे जातिगत - धार्मिक अस्तित्व बताने वाले इस प्रजातंत्र में जनता को समझना अत्यावश्यक है कि ये अनपढ़ नेता हमें अस्तित्व, विश्वास, सत्य का पाठ क्यों पढ़ा रहे है।
राजनीति में सच्चे और पढ़े लिखे युवाओं, नेताओं के भाग न लेने से आज अनपढ़, मवाली, अपराधिक प्रवृत्ति के लोग राजनेता बने बैठे हुए है। इसका दण्ड हमारे देश और वर्तमान के साथ-साथ हमारी नयी पीढ़ी को भी भुगतना पड़ता है।
इन नेताओं का मकसद क्या है?
क्यों दो जातियों के बीच नफरत फैलाना ?
क्यों दो धर्म के लोगों को आपस में लड़वाना?
पर ये लोग ऐसा क्यों करना चाहते है?
इसमें उनका क्या लाभ है?
हो सकता है कि वे ऐसा करके सत्ता में बने रहना चाहते हो , उनको वोट मिलता रहे । पर अपने ही देश की जनता के बीच फूट और नफरत पैदा कौन इंसान करता है कोई बुरे से बुरा देश के नेता भी ऐसा करने से पहले सौ बार सोचेगा । यह बहुत ही दुःखद है, शर्मनाक है। क्योंकि लोग जाति , धर्म के आधार पर लड़ते-लडते मर जाएंगे तब वास्तव में इससे हमारा अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
इसलिए हर क्षेत्र में पुनर्जागरण और मानसिक नवाचार, नयी सोच अत्यंत आवश्यकता है हमे स्वयं ही उठकर आगे बढ़ना होगा नहीं तो आने वाले भविष्य में हमारी भावनाओ हमारे स्वाभिमान, हमारे अस्तित्व से हर कोई खेलेगा और क्या पता हम एक नये तरह की कट्टरता, नफरत, नरसंहार रुपी गुलामी की खाई में फेंक दिया जाए।
भारत में दंगों की सूची जिन्हें सुनकर रूह कांप जाती है
https://en.m.wikipedia.org/wiki/List_of_riots_in_India
गौर करने वाली बात यह है कि पहले अनपढ़ नेता यह नफरती काम चुनावी मौसम में ज्यादातर करते थे। परंतु हाल के दिनों में यह नफरत , टकराव, हिंसा अब और बढ़ जाएगी क्योंकि कुछ टीवी न्यूज चैनल, मैनस्ट्रीम मीडिया यह काम अब रोज दिन-प्रतिदिन कर रही है । और करती जा रही है खैर मीडिया पर चर्चा किसी अन्य बातचीत में करेंगे।

धन्यवाद . . . .
विचार:- दिनेश उपाध्याय
https://youtu.be/J6MbOGqdUD4
ReplyDeletePushpendra kulshreshth को सुन लें और फिर बताएं इस देश को इन तथाकथित अल्प संख्यकों ने कितना चुसा है
ये कोई धार्मिक वक्तव्य नहीं है यह न केवल हिन्दु मुस्लिम के ऊपर बात नहीं करता है बल्कि यह कुछ अनपढों नेताओं के द्वारा देश में जो फूट, बर्बादी की व्यवस्था चलाई जा रही है उस पर कटाक्ष है
DeleteAapka lekh padh kr kafi achha lga apke vichar logo ko jagruk kdte h.
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