लद्दाख की चिंताओं को सुनें पृष्ठभूमि: लद्दाख में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच ' सबसे खूनी दिन ' ( सबसे अधिक मौत वाले दिन) को लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। प्रदर्शनकारियों की मौत के कारण वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। जब धारा 370 हटाई गई थी , तब लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने का स्वागत किया गया था। बीजेपी नेता जमयांग त्सेरिंग नामग्याल और इंजीनियर सोनम वांगचुक ने भी इस फैसले की तारीफ की थी। लेकिन अब नामग्याल ने खुद कहा है कि "लद्दाख नाजुक मोड़ पर खड़ा है।" वहीं , सोनम वांगचुक को पुलिस ने ' भड़काऊ ' भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य मुद्दे और सरकार की प्रतिक्रिया: चार निहत्थे प्रदर्शनकारियों की मौत गोली लगने से हुई। संपादकीय में कहा गया है कि पुलिस की सख्त कार्रवाई किसी समस्या का समाधान नहीं है। लद्दाख के लोगों की दो मुख्य माँगें हैं: राज्य का दर्जा: लगभग 3 लाख की आबादी वाले लद्दाख को राज्य का दर्जा मिलना बहुत मुश्किल है , खासकर जब जम्मू और क...
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