Skip to main content

Posts

Showing posts from October, 2020

ज्ञान v/s धनवान v/s बलवान #6

एक बात तो पक्की है कि जिसके पास शारीरिक बल है और शक्ति है तो ये सब उसके लिए एक सीढ़ी के रूप में है । जो एक निश्चित समय और  निश्चित सीमा के बाद खत्म हो जाएगी और जीवन भर वह शारीरिक आपूर्ति की चिंता में रहेगा ।  वहीं जिसके पास पैसा है धन दौलत है वह भी एक निश्चित सीमा और निश्चित समय तक ऊंचाई तक बढ़ता है फिर उसको आखिर में नीचे आना ही पड़ता है और अधिकांश अमीर इंसान अपनी सारी जिंदगी केवल अपनी अमीरी बरकरार रखने की चिंता में गुजार देते है और लाभ हानि का सोच सोचकर गुजर जाते है। धिक्कार है ऐसी जिंदगी पर ।  तो संपूर्ण संसाधन स्रोत या तत्व क्या होना चाहिए जोकि जीवन खुशहाल और संपूर्ण सुव्यवस्थित रखे ।  मुझे लगता है ज्ञान । हाँ सात्विक ज्ञान ही एक ऐसा माध्यम है जो ये सब कर सकता है । सात्विक ज्ञान एक मामूली इंसान को पंख प्रदान कर अनंत ऊंचाई में उड़ने में मदद करता है । ज्ञान व्यक्ति को जीरो से हीरो बना सकता है  इसलिए ज्ञान एक सीढ़ी नहीं है यह तो पंख है जो चारो दिशाओं , असीमित ऊंचाई , असीमित समय तक उड़ने में मदद करता है, अतः ज्ञान को ही प्राथमिकता देनी चाहिए  ...

अनपढ़ नेताओं द्वारा देश में उत्पन्न नफरती माहौल की महाभारत #5

ये जो देश में हिन्दु-मुस्लिम, ब्राम्हण-दलित, मुस्लिम- सिक्ख, और कुछ राज्यों में जैसे मराठों, जाटों, पटेलों, सवर्णों, यादवों, का अपने से दूसरे समुदायों के प्रति जो दुर्भावना, द्वेष और आपसी टकराव ने जिस तरह से अपनी जड़ें जमा ली है और जिस तरह जमकर यह फल- फूल रहा है वह देश के लिए बहुत खतरनाक है | हमें समझना होगा कि जो हमें जाति धर्म के नाम पर बांट रहे है वे केवल अपने सत्ता में बने रहने के लिए केवल वोट पाना चाहते है और उन्हें हमारे हितों से कुछ हमदर्दी नहीं है । ये आरक्षण का लॉलीपोप इसीलिए पकड़ाया जाता है कि समाज में ये जातिवाद, भेदभाव का मुद्दा बना रहे । हमें समझना होगा कि ये राजनेताओं के लिए रोजगार का साधन मात्र है इसमें आम लोगों , गरीबों का कुछ फायदा नहीं है | मैनें अमीर इसलिए नहीं लिखा क्योंकि वो किसी भी जाति का हो उसे इस घटिया साधन की उसे कोई आवश्यकता कतई नहीं है, गरीब भी इसे समझता है कि क्या हमारे लिए सही है और क्या गलत है| पर जब बात रोटी, कपड़ा, मकान की आती है तब वह बेबस होकर विभाजित हो जाता है। गौर करने वाली बात यही से शुरू होती है कि क्यों हम इस नफरतों के माहौल में ...