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Showing posts from July, 2024

देखो फ्रांस की "सीन अब साफ है", हमारी गंगा कब होगी ?

बड़ी नदियों को साफ करना कभी आसान नहीं होता। लेकिन यह बोलना और साबित करना कि वे साफ हैं इसमें ज़मीन आसमान का अंतर है  और साथ ही उस नदी पर नागरिकों का विश्वास पैदा करना और भी मुश्किल है।  पेरिस की मेयर ऐनी हिडाल्गो ने इसे साबित करने के लिए स्वयं सीन नदी में तैर कर दिखा दिया, कि हाँ नदी बिल्कुल साफ़ हो चुकी है । अगर आपको भारत में भी कोई नेता या मंत्री ऐसा कहते हुए दिख जाये की हमने ये नदी साफ़ कर दी वो कर दी तो उन्हें बस यह कह देना की आप ही ज़रा इसमें तैर कर या स्नान करके दिखा दीजिये । इस सप्ताह की शुरुआत में, ऐनी सीन नदी में तैरने के लिए उतरीं, ताकि यह साबित किया जा सके कि शहर की सबसे प्रसिद्ध नदी को इस महीने के अंत में ओलंपिक तैराकों के तैरने के लिए पर्याप्त रूप से साफ कर दिया गया है।  सीन नदी में तैराकी पर 1923 से ही प्रतिबंध लगा हुआ था, क्योंकि इसमें प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक था। 2015 से, आयोजकों ने ओलंपिक के लिए इसे तैयार करने और यह सुनिश्चित करने के लिए 1.5 बिलियन डॉलर का निवेश किया कि खेलों के बाद पेरिस के लोगों के पास एक साफ नदी हो।  ऐसा लगता है कि अब पेरिस के लोगों ...

क्या प्रशासनिक सेवा की गहरी भूख युवाओं को अपराधिक कृत्य करने की ओर ले जा रही है ?

प्रशिक्षण प्राप्त कर रही आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर के प्रकरण ने देश की प्रशासनिक सेवा की कई संस्थाओं के कारनामों को एक साथ उजागर कर दिया है।  पूजा खेडकर अभी लालबहादुर शास्त्री अकादमी, मसूरी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उनकी यह ट्रेनिंग अगले साल जुलाई में पूरी होगी।  इस दौरान उन्हें फील्ड ट्रेनिंग के लिए असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में पुणे भेजा गया। वहां जाते ही उन्होंने सभी नियम-कायदे और नैतिकता को ताक पर रख ऐसे-ऐसे काम किए, जो देश की पूरी प्रशासनिक सेवा के लिए कलंक कहे जा सकते हैं।  उन्होंने वहां जाते ही लाल बत्ती लगी सरकारी गाड़ी, एक अलग आफिस, घर और चपरासी इत्यादि की मांग की। यहां तक कि अपनी निजी आडी गाड़ी पर खुद ही अवैध रूप से लाल बत्ती भी लगवा ली,  जबकि उस गाड़ी के खिलाफ यातायात नियमों के उल्लंघन के दर्जन भर मामले दर्ज हैं और जुर्माना तक बकाया है। बीते दिनों उसे जब्त कर लिया गया। आईएएस अधिकारी बनने के बाद उन पर ऐसा नशा छाया कि पुणे में तैनात एक अन्य अफसर के कार्यालय से जबरन उनका नाम हटाकर अपनी नेम प्लेट लगा दीं। हालांकि इस प्रकरण के सामने आना एक मायने में सही स...

तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को देना पड़ेगा गुजारा भत्ता : सुप्रीम कोर्ट

  गुजारे का हक मिलेगा : सुप्रीम कोर्ट  तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के लिए गुजारा भत्ता संबंधी सर्वोच्च न्यायालय का फैसला ऐतिहासिक है। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने ‘मोहम्मद अब्दुल समद बनाम तेलंगाना राज्य…’ मामले में स्पष्ट कहा है कि हर महिला को गुजारा भत्ता पाने का अधिकार है, चाहे वह किसी भी धर्म की हो। दरअसल, अभी तक मुस्लिम पर्सनल कानून के तहत तलाकशुदा महिलाओं का गुजारा भत्ता तय होता था। शरीअत कानून के मुताबिक इद्दत की अवधि तक ही तलाकशुदा महिला को गुजारा भत्ता दिया जा सकता है। इद्दत यानी तीन महीने की वह अवधि, जिसमें महिला किसी दूसरे के साथ विवाह नहीं कर सकती। मगर सर्वोच्च न्यायलय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 125 को सभी महिलाओं पर समान रूप से लागू करार देते हुए कहा कि हद्दत के बाद भी महिलाएं गुजारा भत्ते का दावा कर सकती है। हैदराबाद उच्च न्यायालय ने एक मामले में फैसला दिया था कि पति अपनी तलाकशुदा पत्नी को गुजारा भत्ता दे। उसी फैसले को पति ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उसकी दलील थी कि मुसलिम महिला (विवाह विच्छेद पर अधिकारों का संरक्...